इलाहाबाद हाईकोर्ट: निर्दोष को हिरासत में रखने पर पुलिस पर जुर्माना
ब्रेकिंग: अभियुक्त को सरेंडर के लिए मजबूर करने हेतु पुलिस निर्दोष परिजन को हिरासत में नहीं रख सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट पुलिसकर्मियों के वेतन से वसूला जाएगा ₹40,000 मुआवज़ा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस किसी अभियुक्त पर आत्मसमर्पण का दबाव बनाने के लिए उसके निर्दोष परिजन को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में नहीं ले सकती। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की पीठ ने कहा कि ऐसी हिरासत व्यक्ति की स्वतंत्रता का अवैध हनन है और पीड़ित मुआवज़े का हकदार है।
कोर्ट ने अरविंद कुमार यादव की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें ₹40,000 का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। यादव को थाना जॉर्ज टाउन, प्रयागराज में रखा गया था। यह राशि दोषी पुलिसकर्मियों के वेतन से वसूली जाएगी.
