गुजराती लोकगीत समझने की भूल? जानें संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘राम-लीला’ के मशहूर गाने ‘मोर बनी थंगट करे’ की हैरान करने वाली बंगाली कहानी

“सिनेमा और साहित्य का अनूठा संगम: संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘राम-लीला’ के प्रसिद्ध गाने ‘मोर बनी थंगट करे’ का दिलचस्प और अनसुना इतिहास”

विशेष रिपोर्ट: सिनेमा, संस्कृति एवं साहित्य (ऑल RIGHTs मैगजीन)

नई दिल्ली: बॉलीवुड में जब भी बेहतरीन संगीत, भव्य सेट और सांस्कृतिक गहराई की बात होती है, तो निर्देशक संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) का नाम सबसे पहले आता है। साल 2013 में रिलीज हुई उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ (Ram-Leela) आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म का हर एक गाना अपने आप में एक मास्टरपीस था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म का एक बेहद लोकप्रिय गाना, जिसे लोग आज तक शुद्ध गुजराती लोकगीत समझकर आनंद लेते हैं, असल में उसकी जड़ें बंगाल की मिट्टी और विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की एक कविता से जुड़ी हुई हैं?

1. गुजराती नहीं, बंगाली कविता से जुड़ा है ‘मोर बनी थंगट करे’ का इतिहास

  • रवींद्रनाथ टैगोर की कविता से प्रेरणा: फिल्म का यह लोकप्रिय गीत ‘मोर बनी थंगट करे’ (Mor Bani Thangat Kare) पहली नजर में पूरी तरह गुजराती लोकगीत जैसा प्रतीत होता है, जिसे उस्मान मीर और अदिति पॉल ने अपनी जादुई आवाज से सजाया है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि यह गीत मूल रूप से नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रची गई एक प्रसिद्ध बंगाली कविता ‘नववर्ष’ (Navavarsha) (जिसका अर्थ है ‘नई बारिश’) पर आधारित है।

  • झवेरचंद मेघानी द्वारा गुजराती अनुवाद: प्रसिद्ध गुजराती कवि और स्वतंत्रता सेनानी झवेरचंद मेघानी ने जब टैगोर की यह बंगाली कविता सुनी, तो वे इससे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसका भावपूर्ण गुजराती अनुवाद कर डाला। इसके बाद महान गुजराती लोक गायक हेमू गढ़वी ने इसे पारंपरिक लोक धुन में पिरोया और आकाशवाणी के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुँचाया।

2. भंसाली की नजर और ओसमान मीर की सूफियाना आवाज

  • भंसाली का संगीत प्रेम: गायक ओसमान मीर अपने लाइव शोज और पारंपरिक गरबा कार्यक्रमों में अक्सर इस गीत को गाया करते थे। जब निर्देशक संजय लीला भंसाली ने पहली बार इसे सुना, तो वे इसकी सुरीली लय और ऊर्जा से इतने मंत्रमुग्ध हुए कि उन्होंने इसे अपनी फिल्म के ओपनिंग टाइटल क्रेडिट्स में शामिल करने का निर्णय लिया।

  • फिल्मफेयर नॉमिनेशन: ओसमान मीर की भारी, बुलंद और सूफियाना आवाज में गाया गया यह गीत फिल्म की शुरुआत से ही दर्शकों को गुजरात की संस्कृति और लोक संगीत से जोड़ देता है। इस गाने के लिए ओसमान मीर को फिल्मफेयर में ‘बेस्ट म्यूजिक डेब्यू’ का प्रतिष्ठित नॉमिनेशन भी मिला था।

3. सिनेमा के जरिए पुनर्जीवित हुई लोक कला

फिल्म ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ के जरिए इस पारंपरिक और साहित्यिक रचना को आधुनिक सिनेमा के माध्यम से वैश्विक मंच मिला। यह इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे महान साहित्य और लोक संगीत सीमाओं से परे जाकर एक नई पहचान गढ़ सकते हैं।

‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ भारतीय कला, संस्कृति, सिनेमा और साहित्य के गौरवशाली इतिहास से जुड़ी अनकही कहानियों को लगातार अपने पाठकों तक पहुँचाती रही है।

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