शायरी की गहराई और सुरों की मिठास का संगम, ‘बाज़ाहिर क्या है’ से सजेगी संगीत की महफ़िल
शायरी की गहराई और सुरों की मिठास का संगम, ‘बाज़ाहिर क्या है’ से सजेगी संगीत की महफ़िल
वेद अख्तर के अल्फ़ाज़, मोहम्मद वकील की आवाज़: ‘बाज़ाहिर क्या है’ में सजेगी रूहानी महफ़िल
शायरी और सुरों का अनूठा संगम! जावेद अख्तर और मोहम्मद वकील लेकर आए नई ग़ज़ल
मुंबई (अनिल बेदाग): जब जावेद अख्तर की कलम से निकले अल्फ़ाज़ मोहम्मद वकील की राग आधारित गायकी से मिलते हैं, तो संगीत सिर्फ सुनाई नहीं देता, बल्कि दिल में उतर जाता है। पद्म भूषण सम्मानित जावेद अख्तर और ‘सा रे गा मा’ मेगा फाइनल्स विजेता मोहम्मद वकील की नई ग़ज़ल ‘बाज़ाहिर क्या है’ इसी खूबसूरत एहसास को जीवंत करने जा रही है। यह विशेष प्रस्तुति संगीत मंच Goongoonalo पर रिलीज़ होगी।
‘हमारे शौक़ की’ एल्बम का हिस्सा यह ग़ज़ल बाहरी चमक-दमक और मन की वास्तविक संतुष्टि के बीच के अंतर को बयां करती है। जावेद अख्तर की गहरी शायरी को मोहम्मद वकील ने शास्त्रीय संगीत की आत्मा और समकालीन पश्चिमी संगीत के तत्वों के साथ सजाया है, ताकि इसकी संवेदनाएं हर पीढ़ी तक पहुंच सकें।

मोहम्मद वकील के लिए जावेद अख्तर की शायरी को सुरों में ढालना सम्मान के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी रही। उस्ताद मोहम्मद हुसैन और उस्ताद अहमद हुसैन से संगीत की तालीम लेने वाले वकील ने 1997 में ‘सा रे गा मा’ जीतकर पहचान बनाई। तीन दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने अपनी रागदारी आधारित गायकी से ग़ज़ल को खास पहचान दी है।

भारतीय संगीत की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से काम कर रहा Goongoonalo इस प्रस्तुति के जरिए पारंपरिक महफ़िल की आत्मीयता को आधुनिक अंदाज में सामने ला रहा है। ‘बाज़ाहिर क्या है’ शायरी, राग और भावनाओं का ऐसा संगम है, जो संगीतप्रेमियों को ठहरकर सुनने और महसूस करने का मौका देगा।
