58 लाख वोटर कटे: SC सख्त, माँगा जवाब

वोटर लिस्ट से 58 लाख नाम गायब! टीएमसी सांसद पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग से एक हफ्ते में मांगा गया जवाब

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट को लेकर सियासी और कानूनी घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद डोला सेन ने चुनाव आयोग (EC) पर मनमानी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58 लाख से अधिक नाम अवैध तरीके से हटा दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और एक हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।


क्या है पूरा मामला? 58 लाख नामों का ‘गणित’

डोला सेन की याचिका के अनुसार, बंगाल की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 16 दिसंबर को प्रकाशित हुई थी। आंकड़ों के लिहाज से यह बदलाव चौंकाने वाला है:

  • वोटरों की संख्या में गिरावट: 2025 के रिवीजन के बाद राज्य में वोटर्स की संख्या 7.66 करोड़ थी, जो अब घटकर 7.08 करोड़ रह गई है।

  • बिना नोटिस कार्रवाई: आरोप है कि 58,20,898 नाम बिना किसी व्यक्तिगत सुनवाई या नोटिस के काट दिए गए।

  • दस्तावेजों पर विवाद: याचिका में मांग की गई है कि पंचायत रेसिडेंस सर्टिफिकेट और फैमिली रजिस्टर जैसे वैध दस्तावेजों को स्वीकार किया जाए, जिन्हें आयोग फिलहाल मानने से इनकार कर रहा है।


कपिल सिब्बल की दलील: ‘व्हाट्सऐप’ से चल रहा है चुनाव आयोग?

सुप्रीम कोर्ट में डोला सेन की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की। उन्होंने आयोग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा:

  1. मौखिक निर्देश: चुनाव आयोग अपने अधिकारियों को लिखित आदेश के बजाय व्हाट्सऐप मैसेज और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निर्देश दे रहा है।

  2. पारदर्शिता का अभाव: सिब्बल ने दलील दी कि वोटर लिस्ट तैयार करने जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के सभी निर्देश लिखित होने चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

  3. सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग: कई विधानसभा क्षेत्रों में नाम काटने की प्रक्रिया (ASDD कैटेगरी) स्थानीय स्तर के बजाय सेंट्रलाइज्ड तरीके से हो रही है, जो नियमों के विरुद्ध है।


सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमल्या बागची की बेंच ने चुनाव आयोग के वकील को शनिवार तक जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है। कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट में पारदर्शिता एक बड़ी चुनौती है। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को तय की गई है।

बड़ी मांग: डोला सेन ने क्लेम और ऑब्जेक्शन दाखिल करने की आखिरी तारीख (15 जनवरी) को भी आगे बढ़ाने की मांग की है ताकि प्रभावित वोटर्स को अपनी बात रखने का मौका मिल सके।


आशंका: क्या चुनाव की आहट है वजह?

सांसद डोला सेन को आशंका है कि फाइनल वोटर लिस्ट जारी होते ही बंगाल विधानसभा चुनावों की घोषणा की जा सकती है। इसीलिए उन्होंने मांग की है कि आयोग को ‘रिवीजन प्रोसेस’ को तुरंत ठीक करने का निर्देश दिया जाए ताकि कोई भी योग्य मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे।


मुख्य हाइलाइट्स:

  • हटाए गए नाम: 58,20,898 (बिना व्यक्तिगत सुनवाई के)।

  • कोर्ट का एक्शन: चुनाव आयोग को 19 जनवरी तक जवाब देने का निर्देश।

  • विवाद: व्हाट्सऐप निर्देशों और दस्तावेजों की वैधता पर सवाल।

  • असर: बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर पड़ सकता है असर।


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