**रेलवे पटरियों पर क्यों बिछे होते हैं पत्थर?**
ट्रेन की पटरियों पर पत्थर क्यों बिछे होते हैं?
नई दिल्ली। ट्रेन से सफर करते समय अक्सर पटरियों के बीच और आसपास बिछे नुकीले पत्थरों पर ध्यान जाता है। इन पत्थरों को तकनीकी भाषा में ‘ट्रैक बैलास्ट’ (Track Ballast) कहा जाता है। दिखने में साधारण लगने वाले ये पत्थर ट्रेन की सुरक्षा और ट्रैक के संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पटरियों पर पत्थर बिछाने के 5 प्रमुख कारण
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वजन का समान बंटवारा: हजारों टन वजनी ट्रेन के गुजरने पर स्टील की पटरियां और कंक्रीट के स्लीपर्स पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। बैलास्ट इस वजन और दबाव को सोखकर जमीन पर बराबर फैलाते हैं, जिससे पटरियां धंसती नहीं हैं।
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पटरियों को खिसकने से रोकना: तेज रफ्तार ट्रेन के कंपन (Vibration) से स्लीपर्स अपनी जगह से खिसक सकते हैं। इसके लिए हमेशा नुकीले और खुरदुरे पत्थरों का उपयोग किया जाता है, जो आपस में लॉक होकर पटरियों को अपनी जगह मजबूती से जमाए रखते हैं।
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जल निकासी की बेहतर व्यवस्था: बारिश के समय पटरियों पर पानी जमा होने से मिट्टी ढीली पड़ सकती है। पत्थरों की परत पानी को तुरंत नीचे से बहने का रास्ता देती है और ट्रैक पर जलभराव नहीं होने देती।
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झाड़ियों और घास को उगने से रोकना: यदि पटरियों के पास खाली मिट्टी रहे, तो वहां पेड़-पौधे और झाड़ियां उग आएंगी, जिससे ट्रैक बाधित हो सकते हैं। बैलास्ट मिट्टी को ढककर पेड़-पौधों के विकास को रोकते हैं।
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शोर और कंपन कम करना: पटरियों पर दौड़ती ट्रेन से होने वाली भारी आवाज और वाइब्रेशन को ये पत्थर ‘शॉक अब्जॉर्बर’ की तरह सोख लेते हैं, जिससे पटरियों का शोर काफी कम हो जाता है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

