राहुल गांधी अराजक हैं और राहुल गांधी गैर-जिम्मेदार हैं, श्री रविशंकर प्रसाद

राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी और विपक्षी गठबंधन आखिर चाहते क्या हैं? क्या वे देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं? दिल्ली के सबसे संवेदनशील इलाके में बैठकर राहुल गांधी जो कर रहे हैं, वह सरासर अराजकता है।

राहुल गांधी, उनके पार्टी अध्यक्ष और उनके सहयोगियों की मांग है कि चुनाव फिर से बैलेट पेपर से कराए जाएं।

इसका सीधा अर्थ यह है कि वे एक ईमानदार और तकनीक-आधारित पारदर्शी चुनाव प्रणाली में जीत नहीं सकते। इसलिए वे बूथ कैप्चरिंग के पुराने दौर में लौटना चाहते हैं, बैलेट बॉक्स में स्याही फेंककर गांवों में दलितों और गरीबों को मतदान से रोकना चाहते हैं, ताकि अपनी उस पुरानी नीति के दम पर चुनाव जीत सकें, जो वे दशकों से अपनाते आए हैं। हम उनके इस रुख की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं।

विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 26 मई के फैसले में स्पष्ट और विस्तृत रूप से कहा कि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह से विधिसम्मत और विश्वसनीय है। जब चुनाव परिणाम इनके पक्ष में नहीं आते, तो ये चुनाव आयोग और EVM पर सवाल उठाने लगते हैं। बंगाल में आप हारे और महज 2 सीटें आईं, बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में भी जनता ने आपको नकारा। तो आखिर आप चाहते क्या हैं?

यह सीधे-सीधे जनता के जनादेश का अनादर है। जनता वोट देकर सरकार चुनती है, आप उस पूरे लोकतांत्रिक चुनाव को ही रद्द करने की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी देश के किसी भी संवैधानिक संस्थान का सम्मान नहीं करते, चाहे वह सुप्रीम कोर्ट हो, निर्वाचन आयोग हो या भारतीय सेना।

जब-जब जनता निष्पक्ष चुनाव में उन्हें पराजित करती है, तब-तब वे एक नया विवाद खड़ा कर देते हैं।

क्या यह सच नहीं है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान लाखों फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए? क्या मृत लोगों को वोट देने का अधिकार होना चाहिए? कई लोग दो-दो जगहों पर वोटर लिस्ट में दर्ज थे, जो कानूनन गलत है। फिर भी विपक्षी दल ऐसी ही व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं? हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पश्चिम बंगाल में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर Judicial Officers को प्रक्रिया की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया था, लेकिन वहां भी उनके काम में बाधा डाली गई।

मैं राहुल गांधी के इस गैर-जिम्मेदाराना आचरण की घोर निंदा करता हूं। वे देश में अराजकता चाहते हैं।

वे कभी सेना प्रमुख पर अनर्गल टिप्पणी करते हैं, तो कभी देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और RSS प्रमुख मोहन भागवत जी पर शर्मनाक व बेबुनियाद आरोप लगाते हैं। हम इन आरोपों की सख्त भर्त्सना करते हैं।

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