भरत तिवारी एनकाउंटर पर उठे सवाल

भरत तिवारी एनकाउंटर: ‘सेल्फ डिफेंस’ या कुछ और? पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मजिस्ट्रेट जांच से खुलेगा पुलिस के दावों का राज
हाल ही में हुए कुख्यात अपराधी भरत तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर (Police Encounter) को लेकर अब कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में सवाल उठने शुरू हो गए हैं। पुलिस जहां इसे पूरी तरह ‘सेल्फ डिफेंस’ (आत्मरक्षार्थ की गई कार्रवाई) बता रही है, वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी जानकारों की नजरें अब आने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Post-Mortem Report) और मजिस्ट्रेट जांच पर टिकी हैं। इस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि मुठभेड़ की हकीकत क्या थी।
🚔 पुलिस का दावा: ‘आत्मरक्षा में चलानी पड़ी गोली’
मुठभेड़ के बाद जारी आधिकारिक बयान में पुलिस प्रशासन ने घटनाक्रम का ब्योरा देते हुए अपनी कार्रवाई को जायज ठहराया है:
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पहले फायरिंग का आरोप: पुलिस का दावा है कि जब आरोपी भरत तिवारी को पकड़ने के लिए घेराबंदी की गई, तो उसने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस टीम पर सीधे जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी।
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जवाबी कार्रवाई: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अपनी और अपनी टीम की जान बचाने के लिए पुलिस कर्मियों को ‘सेल्फ डिफेंस’ में जवाबी गोलीबारी करनी पड़ी, जिसमें भरत तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई।
🔍 पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेंगे कई अहम राज
एनकाउंटर की निष्पक्षता और दावों की सत्यता जांचने के लिए पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी और डॉक्टरों के पैनल की रिपोर्ट सबसे बड़ा सबूत मानी जा रही है:
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गोली लगने का एंगल: फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट यह साफ कर देगी कि गोली कितनी दूरी से और किस एंगल (कोण) से मारी गई थी।
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दूरी और चोट के निशान: क्या वाकई आमने-सामने की मुठभेड़ थी या दूरी कुछ और थी? शरीर पर मिले गनशॉट अवशेष (Gunshot Residue) और चोट के अन्य निशान पुलिस की कहानी को वैज्ञानिक कसौटी पर परखेंगे।
⚖️ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की गाइडलाइंस और जांच
सुप्रीम कोर्ट और एनएचआरसी (NHRC) के कड़े दिशा-निर्देशों के मुताबिक, हर पुलिस एनकाउंटर के बाद एक तय कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है:
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मजिस्ट्रेट जांच (Magisterial Inquiry): मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मजिस्ट्रेट स्तर की जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें घटनास्थल का निरीक्षण और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
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स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग: दूसरी ओर, कुछ हलकों से इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी (जैसे सीआईडी या सीबीआई) से कराने की मांग भी उठ रही है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)
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