हादसे के बाद ही क्यों जागता प्रशासन?
देशभर में ‘अवैध’ होटलों का जाल
सिर्फ गोवा ही नहीं, देश के कई पर्यटन स्थलों और महानगरों में ऐसे हजारों होटल और रेस्टोरेंट हैं जो मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं। तंग गलियों में बने ये होटल ‘मौत के जाल’ की तरह हैं, जहां न तो आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही बाहर निकलने के सुरक्षित रास्ते।
गोवा अग्निकांड ने खोली सिस्टम की पोल; हादसों के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन? अवैध क्लब और होटलों पर बड़ा सवाल
न्यूज डेस्क: गोवा में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद जब जांच शुरू हुई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि क्षेत्र के अधिकांश क्लब और होटल अवैध रूप से चल रहे थे। अब सवाल यह उठता है कि जब तक मासूमों की जान नहीं गई, तब तक प्रशासन इन अवैध निर्माणों से अनजान क्यों था?
हादसे का इंतजार या मिलीभगत?
गोवा की घटना कोई पहली मिसाल नहीं है। अक्सर देखा गया है कि जब कोई बड़ा हादसा (आगजनी या इमारत गिरना) होता है, तब रातों-रात कागजी कार्रवाई तेज हो जाती है और अवैध संपत्तियों को सील करने का दौर शुरू होता है।
-
बड़ा सवाल: क्या प्रशासन को इन अवैध क्लबों और होटलों की जानकारी पहले नहीं थी?
-
लापरवाही: बिना फायर एनओसी (NOC) और बिना नक्शा पास कराए सालों से चल रहे ये संस्थान आखिर किसकी शह पर फल-फूल रहे थे?
सरकार और जनता के लिए ‘अवेयरनेस’ चेकलिस्ट
सरकार को अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि पारदर्शिता (Transparency) लानी होगी:
-
डिजिटल ऑडिट: सभी कमर्शियल प्रॉपर्टीज का डेटा पब्लिक डोमेन में हो ताकि लोग देख सकें कि होटल लीगल है या नहीं।
-
जवाबदेही तय हो: अगर कोई अवैध संस्थान चल रहा है, तो केवल मालिक ही नहीं, उस क्षेत्र के संबंधित अधिकारी पर भी केस दर्ज होना चाहिए।
-
नियमित निरीक्षण: साल में कम से कम दो बार औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) अनिवार्य किया जाए।
जनता के लिए अपील (Awareness)
एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, किसी भी क्लब या होटल में जाने से पहले सुरक्षा मानकों पर गौर करें। अगर आपको कहीं अवैध निर्माण या सुरक्षा में बड़ी चूक दिखती है, तो तुरंत स्थानीय प्रशासन या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं। आपकी एक सतर्कता किसी की जान बचा सकती है।
“प्रशासन की नींद टूटने के लिए किसी लाश के गिरने का इंतज़ार करना, आधुनिक लोकतंत्र की सबसे बड़ी विफलता है।”
रिपोर्ट: रोहिताश कुमार, बरेली
खबरें और भी:-

