वोटर लिस्ट: अखिलेश के बयान पर विवाद

🗳️ “वोटर लिस्ट को सांप्रदायिक रंग न दें”: अखिलेश यादव पर भड़के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, बोले- ‘मुसलमानों ने दिखाई जिम्मेदारी, हिन्दू भाई रहे लापरवाह’

🎯 मुख्य कीवर्ड्स: अखिलेश यादव SIR बयान, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी, मतदाता सूची दुरुस्त, मुस्लिम वोट कटिंग, इलेक्शन कमीशन SIR

बरेली/नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) के स्पेशल समरी रिवीजन (SIR) कार्यक्रम को सांप्रदायिक रंग देने के बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

मौलाना बरेलवी ने अखिलेश यादव के इस आरोप को खारिज किया कि ECI मुसलमानों का वोट काट रहा है। उन्होंने कहा कि यह मुहिम मतदाता सूची दुरुस्त करने के लिए है, न कि हिंदू-मुस्लिम माहौल बनाने के लिए।

📜 “हर चीज़ पर हिंदू-मुस्लिम का लेबल लगाना बचकाना”

मौलाना रजवी बरेलवी ने ECI की मुहिम का बचाव करते हुए कहा कि ECI का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किस क्षेत्र में कितने मतदाता हैं, कितने लोग स्थानांतरित हुए हैं या कितने लोगों का देहांत हो चुका है।

उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा:

“समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव इलेक्शन कमीशन की इस मुहिम को हिन्दू और मुस्लमानों के दरमियान बांट रहे हैं। उनका कहना है कि इलेक्शन कमीशन मुसलमानों का वोट काट रहा है। जबकि हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है। परिपक्व और समझदार नेता हर चीज पर हिन्दू-मुस्लिम का लेबल नहीं लगाते हैं।”

✍️ मुसलमानों ने दिखाई ‘बड़ी जिम्मेदारी’, हिंदू पीछे रहे

मौलाना बरेलवी ने इस बात पर जोर दिया कि मुसलमानों ने पहली बार मतदाता सूची को दुरुस्त करने की दिशा में बड़ी जिम्मेदारी दिखाई है।

  • मुस्लिमों का सहयोग: उन्होंने कहा कि देश के किसी भी कोने में मजदूरी कर रहे मुसलमानों ने भी अपने परिवार से संपर्क करके जिम्मेदारी के साथ SIR फॉर्म भरवाए और बीएलओ (BLO) से संपर्क साधकर कमियों को पूरा किया। खाड़ी देशों में काम करने गए लाखों नौजवानों ने भी इसमें ध्यान दिया।

  • हिंदुओं में लापरवाही: वहीं, दूसरी तरफ मौलाना ने दावा किया कि हिंदू भाइयों ने सुस्ती और लापरवाही का मुजाहिरा किया और वे SIR फॉर्म भरने में मुसलमानों से पीछे रह गए।

🛡️ CAA-NRC का डर बना प्रेरणा का स्रोत

मौलाना बरेलवी ने इस असाधारण भागीदारी की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि गत वर्षों में CAA और NRC कानून बनने के बाद सियासी लोगों और खास कर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने मुसलमानों को डरा दिया था कि इस कानून के जरिए हुकूमत नागरिकता छीनने का प्लान बना रही है।

उनके अनुसार, “ये डर और खौफ मुसलमानों के दिलो-दिमाग में बैठा हुआ था। इसकी वजह से मुसलमानों ने SIR में बहुत अच्छी भूमिका निभाई।”

इस बयान ने साफ कर दिया है कि मुस्लिम समाज का एक प्रमुख धार्मिक नेतृत्व वोटर लिस्ट सुधारने की मुहिम को राजनीतिक और सांप्रदायिक चश्मे से देखने के खिलाफ है।


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