US-ईरान सीजफायर: युद्ध पर लगी रोक
पर्दे के पीछे’ सीजफायर का प्लान: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की इनसाइड स्टोरी
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक जीत सामने आई है। अमेरिका और ईरान ने दो हफ्ते के युद्धविराम (Ceasefire) पर अपनी सहमति दे दी है। इस ऐतिहासिक समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जिसके बाद अब शांति की उम्मीदें जग गई हैं।
📌 समझौते की 5 बड़ी बातें:
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अस्थायी शांति: अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल प्रभाव से 14 दिनों का युद्धविराम लागू।
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होर्मुज जलमार्ग: ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए खोलने पर सहमत।
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इस्लामाबाद वार्ता: शांति को स्थायी बनाने के लिए 10 अप्रैल को पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठक होगी।
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वैश्विक राहत: सीजफायर की खबर से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में 17% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई।
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क्षेत्रीय विस्तार: यह समझौता केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लेबनान जैसे सहयोगी क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
कैसे बनी समझौते की राह?
इस पूरे ‘बैकचैनल’ डिप्लोमेसी का केंद्र पाकिस्तान रहा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान, इस्लामाबाद में बैठकर विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए तैयार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव और तेल की बढ़ती कीमतों ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरानी नेतृत्व को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा
ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर अपना नियंत्रण कड़ा कर लिया था। इस समझौते के तहत ईरान अपनी सेना के समन्वय से जहाजों को रास्ता देने के लिए तैयार हो गया है, जिससे वैश्विक व्यापार में आई रुकावटें दूर होंगी।
चुनौतियां अभी भी बरकरार
कागजों पर युद्धविराम के बावजूद जमीन पर स्थिति नाजुक है। सऊदी अरब, यूएई और इजरायल जैसे देशों में अभी भी एयर डिफेंस सिस्टम अलर्ट पर हैं। ईरान ने प्रतिबंध हटाने और अमेरिकी सेना की वापसी जैसी कड़ी शर्तें रखी हैं, जबकि अमेरिका और इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम कसना चाहते हैं।
आगे क्या होगा?
पूरी दुनिया की नजरें 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर टिकी हैं। यह 14 दिनों की राहत एक स्थायी शांति संधि में बदलती है या फिर तनाव दोबारा भड़कता है, यह आने वाले दिनों की कूटनीति तय करेगी।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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