नशे के लिए कफ सिरप तस्करी में 2 गिरफ्तार
💊 कोडिन सिरप की तस्करी: एबॉट सुपर डिस्ट्रीब्यूटर समेत 2 भाई लखनऊ में गिरफ्तार; फर्जी फर्मों से बांग्लादेश तक सप्लाई
लखनऊ: उत्तर प्रदेश एसटीएफ (Special Task Force) ने एक बड़े ऑपरेशन में फेन्सेडिल कफ सिरप (Phensedyl Cough Syrup) और कोडिन युक्त अन्य दवाओं का अवैध भंडारण और व्यापार करने वाले गिरोह के दो अभियुक्तों को लखनऊ से गिरफ्तार किया है 1। गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्त सगे भाई हैं और सहारनपुर के निवासी हैं 222।
🤝 गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण
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1. अभिषेक शर्मा पुत्र बृजमोहन शर्मा, निवासी सहारनपुर 3। (पहले एबॉट कंपनी का दिल्ली का सुपर डिस्ट्रीब्यूटर था) 4444।
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2. शुभम शर्मा पुत्र बृजमोहन शर्मा, निवासी सहारनपुर 5। (जिसके नाम पर फर्जी फर्म बनाई गई थी) 6।
दोनों अभियुक्तों को दिनांक 11-12-2025 को सुबह 04:20 बजे आलमबाग मवैया रोड पर टेडी पुलिया तिराहे के पास से गिरफ्तार किया गया 7। इनके पास से दो मोबाइल फोन और फर्जी फर्म से संबंधित 31 प्रपत्र (वर्क) बरामद हुए हैं 8888।
🌐 फर्जी फर्मों का जाल और अंतरराष्ट्रीय तस्करी
एसटीएफ की पूछताछ में अभिषेक शर्मा ने पूरे गोरखधंधे का विस्तृत खुलासा किया9:
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तस्करी का मार्ग: यह गिरोह फेन्सेडिल कफ सिरप को फर्जी फर्मों के माध्यम से खरीद-बिक्री दिखाकर नशे के रूप में प्रयोग करने हेतु तस्करों को सप्लाई करता था 1010। यह माल बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजा जाता था 11111111।
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फर्जी फर्म निर्माण: आरोपी विशाल सिंह और विभोर राणा के कहने पर सी.ए. अरुण सिंघल 12ने इनके नौकरों और परिचितों के नाम पर कई फर्जी/बोगस फर्म बनाई थीं (जैसे सचिन मेडिकोज, मारुति मेडिकोज, श्री बालाजी संजीवनी, चरण पादुका) 13131313।
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बिलिंग का तरीका: एबॉट कंपनी से मँगाए गए सिरप को पहले उत्तराखण्ड और पश्चिम उत्तर प्रदेश की दवा फर्मों को कागजों में बेचा जाता था 1414। फिर फर्जी ई-वे बिल तैयार कर तस्करों को बेच दिया जाता था 15151515।
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एबॉट सुपर डिस्ट्रीब्यूटर: अभिषेक शर्मा, जो बाद में विशाल सिंह की फर्म बी०एन० फार्मास्युटिकल के लाइसेन्स पर केयरिंग एंड फारवर्डिंग एजेंट (CFA) बन गया था 16, उसकी फर्म मारुति मेडिकोज जनवरी 2024 में एबॉट की उत्तराखंड सुपर डिस्ट्रीब्यूटर बन गई थी 17।
💰 शुभम शर्मा को मिलते थे ₹1 लाख महीना
अभिषेक के छोटे भाई शुभम शर्मा ने बताया कि वह दुबई में पोर्ट आपरेशनल ऑफिसर की नौकरी छोड़कर वापस आया था 18। विशाल सिंह और विभोर राणा ने उसके डॉक्यूमेंट लेकर उसके नाम पर श्री बालाजी संजीवनी नाम से एक फर्म बना दी 19।
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शुभम को इस काम के लिए हर महीने लगभग ₹1,00,000/- मिलते थे 20।
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करीब 8 महीने तक फर्म चलने के दौरान उसे लगभग ₹8 लाख मिले 21।
गिरफ्तारी से बचने के लिए, पिछले महीने विभोर राणा और विशाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद 22, दोनों भाइयों ने अपना नंबर बंद कर लिया और अंबाला में छुप कर रह रहे थे 23।
⚖️ आपराधिक इतिहास और विधिक कार्यवाही
दोनों अभियुक्तों पर थाना सुशान्त गोल्फ सिटी, कमिश्नरेट लखनऊ में मु०अ०सं०-182/2024 (धारा $420/467/468/471/34/120\text{बी}/201$ भा०द०वि०) के तहत मामला दर्ज है 24242424। अभिषेक शर्मा पर गाजियाबाद के नन्दग्राम थाने में NDPS एक्ट के तहत भी एक मामला दर्ज है 25।
एसटीएफ अब तस्करी में संलिप्त पश्चिम बंगाल के दो अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी और साक्ष्य संकलन की कार्यवाही कर रही है 26।
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