बीडीए की सलाह: स्वीकृत कॉलोनी में ही लें मकान
“अवैध में 100 गज से बेहतर, बीडीए से पास में 50 गज का मकान”: सुनियोजित विकास और नक्शा पास कॉलोनियों पर बीडीए का बड़ा बयान
बरेली: शहर में तेजी से हो रहे अनियोजित विकास के खतरों से नागरिकों को बचाने और सुनियोजित कॉलोनियों के महत्व को रेखांकित करने के लिए बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) ने एक जन-जागरूकता पहल शुरू की है। ‘जागरण विमर्श’ कार्यक्रम के दौरान बीडीए के चीफ टाउन प्लानर (CTP) अजय कुमार सिंह और अवर तकनीकी अभियंता राकेश शर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी जीवन भर की कमाई लगाने से पहले कॉलोनी के बीडीए से स्वीकृत होने की पूरी पड़ताल अवश्य करें।
चीफ टाउन प्लानर ने बेहद व्यावहारिक सलाह देते हुए कहा, “अनाधिकृत और अवैध कॉलोनी में 100 गज का मकान बनवाने या जमीन खरीदने से कहीं बेहतर है कि नागरिक बीडीए से स्वीकृत कॉलोनी में 50 गज का मकान बनवाएं।”
स्वीकृत बनाम अवैध कॉलोनी: सुविधाओं और समस्याओं का अंतर
बीडीए अधिकारियों ने सुनियोजित विकास के फायदों और अवैध निर्माण के दुष्प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी:
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मूलभूत सुविधाएं एवं सुरक्षा: विकास प्राधिकरण से स्वीकृत कॉलोनियों में चौड़ी सड़कें, उचित ड्रेनेज (नाली व्यवस्था), सीवर नेटवर्क, पार्क, स्ट्रीट लाइट और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाएं पहले से सुनियोजित होती हैं।
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अवैध कॉलोनियों का संकट: अनाधिकृत रूप से विकसित हो रही कॉलोनियों में निवासियों को बाद में संकरी सड़कों, बिजली संकट, जलभराव (Waterlogging) और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
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नागरिकों की भी जिम्मेदारी: अनियोजित विकास को रोकना केवल बीडीए का काम नहीं है, बल्कि आम जनता को भी सजग रहकर अवैध कॉलोनियों में प्लाट या मकान खरीदने से बचना होगा।
छोटे मकानों के लिए ‘फास्ट पास मॉड्यूल’: सिर्फ 1 रुपये की टोकन राशि पर नक्शा मंजूर
घर का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को बेहद सरल और सुलभ बनाने के लिए बीडीए ने डिजिटल व्यवस्था लागू की है:
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सेल्फ सर्टिफिकेशन सुविधा: 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भवनों के मानचित्र (Map) आर्किटेक्ट से बनवाकर ‘फास्ट पास मॉड्यूल’ (Fast Pass Module) पोर्टल पर अपलोड किए जा सकते हैं।
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तत्काल स्वीकृति: पोर्टल पर मात्र 1 रुपये की टोकन राशि जमा करके सेल्फ सर्टिफिकेशन (Self Certification) के जरिए घर बैठे तुरंत स्वीकृत नक्शा प्राप्त किया जा सकता है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ नागरिकों से अपील करती है कि वे अपने सपनों का आशियाना बनाते समय बीडीए के नियमों का पालन करें और सुरक्षित व सुनियोजित भविष्य चुनें।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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