रामायण से जुड़े मिथकों की सच
रामायण से जुड़े ये प्रचलित मिथक और उनकी सच्चाई: क्या हनुमान जी हमेशा साथ रखते थे गदा? जानिए पौराणिक तथ्य
विशेष धर्म एवं संस्कृति ब्यूरो: नई दिल्ली
हिंदू धर्म साहित्य में रामायण और महाभारत दो ऐसे महाकाव्य हैं, जो सदियों बाद भी अपनी जीवंत कथाओं, आदर्शों और जीवन मूल्यों के लिए प्रासंगिक हैं। रामायण महाकाव्य विशेष रूप से अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।
हम सभी ने बचपन से रामायण की कहानियों को पौराणिक किताबों, टीवी सीरियल्स और लोक कथाओं के माध्यम से सुना और पढ़ा है। हालांकि, लंबे समय से चले आ रहे इन माध्यमों के कारण रामायण से जुड़े कुछ ऐसे मिथक भी जनमानस में रच-बस गए हैं, जो मूल ग्रंथों से अलग हैं। आइए जानते हैं रामायण के ऐसे ही कुछ प्रमुख मिथकों और उनकी पौराणिक सच्चाई के बारे में।
मिथक 1: हनुमान जी हमेशा हाथों में गदा रखते थे?
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जनधारणा (मिथक): टीवी सीरियल्स और तस्वीरों के माध्यम से यह धारणा बन गई है कि हनुमान जी हर समय अपने हाथ में भारी गदा धारण किए रहते थे।
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पौराणिक सच्चाई: महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण के अनुसार, युद्ध के दौरान हनुमान जी ने आवश्यकतानुसार गदा अस्त्र का प्रयोग तो जरूर किया था, लेकिन वह मुख्य रूप से ‘द्वंद्व युद्ध’ और ‘हस्त युद्ध’ (मल्लविद्या) में अत्यंत निपुण थे। लंका दहन से लेकर रणभूमि तक, हनुमान जी ने कई विशालकाय राक्षसों का वध अपने वज्र समान हाथों, घूंसे और लातों से किया था।
रामायण से जुड़े अन्य चर्चित मिथक
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लक्ष्मण रेखा का जिक्र: जनमानस में यह माना जाता है कि लक्ष्मण जी ने सीता माता की सुरक्षा के लिए कुटिया के बाहर रेखा खींची थी। हालांकि, वाल्मीकि रामायण में ‘लक्ष्मण रेखा’ का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं मिलता; यह प्रसंग बाद की रामलीलाओं और क्षेत्रीय साहित्य के जरिए अधिक प्रचलित हुआ।
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रामसेतु निर्माण में गिलहरी के निशान: सेतु निर्माण के समय भगवान श्री राम द्वारा गिलहरी की पीठ पर हाथ फेरने और उस पर तीन धारियां बनने की कथा लोक कथाओं में काफी प्रसिद्ध है, जो समर्पण और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है।
धर्म एवं संस्कृति ब्यूरो: नई दिल्ली
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

