SIR ड्यूटी का तनाव! फिर हुई BL O की मौत
💔 बरेली में SIR ड्यूटी का ‘खौफ’: ‘असहनीय दबाव’ बना तीसरी मौत की वजह, प्रिंसिपल की हार्ट अटैक से मौत, ड्यूटी हटाने की गुहार भी हुई अनसुनी
बरेली, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) कार्यक्रम अब केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बीएलओ (BLO) के लिए खौफ का दूसरा नाम बनती जा रही है। जिले में एक के बाद एक लगातार बीएलओ की मौतों ने पूरे शिक्षा विभाग को झकझोर कर रख दिया है।
ताज़ा घटना में, बिशारतगंज क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय कन्या कंपोजिट के इंचार्ज प्रधानाचार्य विनोद कुमार शर्मा की अचानक मौत हो गई। वह बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 261 के बीएलओ के रूप में SIR ड्यूटी निभा रहे थे। लगातार तीन मौतों के बाद, बीएलओ और उनके परिवारों में दहशत का माहौल है।

😢 परिजनों का सीधा आरोप: ‘दबाव ने ली जान’
विनोद कुमार शर्मा (जो 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले थे) रविवार रात भोजन के बाद सोने गए थे, तभी रात करीब 12 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई।
मृतक के पुत्र शिवांश शर्मा ने सिस्टम पर सीधा और गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता की उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद, SIR के काम का असहनीय दबाव ही उनकी मौत की वजह बना और उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था।
📝 ड्यूटी हटाने की गुहार को सिस्टम ने मोड़ा मुंह
शिवांश शर्मा ने बताया कि उनके पिता ने खंड शिक्षा अधिकारी मझगवां को लिखित पत्र देकर SIR ड्यूटी से मुक्त किए जाने की गुहार लगाई थी। पत्र में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित कारणों का उल्लेख किया गया था:
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स्वास्थ्य समस्याएं: आंखों की गंभीर समस्या और बढ़ती उम्र।
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ऑनलाइन कार्य में असमर्थता: मोबाइल आधारित ऑनलाइन कार्य करने में अक्षमता।
याचिका के बावजूद, उनकी फरियाद को अनसुना कर दिया गया, जिसके बाद वह लगातार भारी तनाव में रहने लगे थे।
🚨 यह तीसरी मौत, फिर भी नहीं टूटी सिस्टम की नींद
यह बरेली में दबाव के कारण हुई पहली मौत नहीं है। इससे पहले भी शिक्षक सर्वेश कुमार गंगवार की SIR ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है।
लगातार हो रही मौतों के बावजूद, न तो प्रशासनिक सिस्टम ने कोई सबक सीखा और न ही ड्यूटी के मानकों और शिक्षकों के स्वास्थ्य की स्थिति पर कोई पुनर्विचार किया गया। सोमवार सुबह विनोद कुमार शर्मा के घर पर शिक्षकों और रिश्तेदारों की भारी भीड़ ने इस घटना पर शोक के साथ-साथ सिस्टम के प्रति गहरा गुस्सा भी व्यक्त किया।
शिक्षा समुदाय अब मांग कर रहा है कि चुनाव आयोग को तत्काल इन ड्यूटी के दबावों की समीक्षा करनी चाहिए और मानवीय आधार पर शिक्षकों को राहत देनी चाहिए।
बरेली से रोहिताश कुमार की रिपोर्ट
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