पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं सुप्रीम कोर्ट; कहा- प्रशासन जमीन पर कराए नियमों का सख्ती से पालन
“सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं, लेकिन नियमों का सख्ती से हो पालन; प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल”
विशेष राष्ट्रीय एवं कानूनी रिपोर्ट (ऑल RIGHTs मैगजीन)
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और त्योहारी सीजन के बीच पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और संतुलित टिप्पणी की है। 29 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध (Total Ban) लगाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन साथ ही यह भी चेताया कि पर्यावरण के प्रदूषण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
1. कोर्ट की अहम टिप्पणियां और निर्देश
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हर साल आदेश जारी करने का फायदा नहीं: जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हर साल केवल आदेश जारी करने का कोई औचित्य नहीं है, जब तक कि प्रशासनिक तंत्र जमीन पर उन नियमों को सख्ती से लागू न करे।
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सख्त कार्रवाई के निर्देश: अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पटाखों से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए।
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प्रसिद्ध हस्तियों की मदद का सुझाव: प्रदूषण के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाने के लिए कोर्ट ने सुझाव दिया कि विराट कोहली जैसे लोकप्रिय खिलाड़ियों और सार्वजनिक हस्तियों (Public Figures) की मदद ली जानी चाहिए ताकि लोग जागरूक हो सकें।
2. त्योहारों की खुशियां और पर्यावरण में संतुलन
अदालत का मुख्य जोर एक ऐसा व्यावहारिक रास्ता निकालने पर है, जिससे एक तरफ त्योहारी सीजन की खुशियों और परंपराओं पर असर न पड़े, और दूसरी तरफ पर्यावरण की सुरक्षा व वायु गुणवत्ता (Air Quality) के बीच उचित संतुलन बना रहे।
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