पैरों में जूते नहीं थे, तन पर साड़ी थी लेकिन आंखों में अपने सपनों को पूरा करने का जुनून था।
रामगढ़ में होमगार्ड भर्ती की दौड़ में एक गरीब परिवार की बेटी ने जो कर दिखाया, वह सिर्फ एक दौड़ जीतना नहीं, बल्कि हौसले और मेहनत की ऐसी कहानी है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
उसके पास न दौड़ने के लिए जूते थे, न ट्राउजर… मजबूरी में उसने साड़ी पहनकर ही दौड़ में हिस्सा लिया। लेकिन शायद उसके हौसले के सामने ये मजबूरियां भी छोटी पड़ गईं।
साड़ी संभालते हुए दौड़ी यह बेटी सिर्फ मैदान में नहीं दौड़ रही थी, बल्कि अपने सपनों, अपने परिवार और बेहतर भविष्य की ओर दौड़ रही थी।
उसने साबित कर दिया कि सफलता के लिए महंगे जूते नहीं, मजबूत हौसला और अथक मेहनत चाहिए। यह सिर्फ एक गरीब बेटी की कहानी नहीं है… यह उन लाखों बेटियों के लिए उम्मीद है, जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं।
