शकील अहमद का राहुल गांधी पर वार
शकील अहमद का कांग्रेस पर बड़ा प्रहार: राहुल गांधी को बताया ‘डरपोक और असुरक्षित’, सियासी गलियारों में भूचाल
नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता और बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शकील अहमद ने राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखा हमला बोला है। अहमद ने राहुल गांधी के नेतृत्व और कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘असुरक्षित’ और ‘तानाशाह’ करार दिया है। उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर और बाहर एक नई बहस छेड़ दी है।
📌 शकील अहमद के वार: मुख्य बातें
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असुरक्षित नेतृत्व: अहमद का दावा है कि राहुल गांधी उन वरिष्ठ नेताओं के साथ असहज महसूस करते हैं जिनका जनता पर मजबूत आधार है। वे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं, इसलिए अनुभवी नेताओं को दरकिनार कर रहे हैं।
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चापलूसी को बढ़ावा: उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी केवल उन्हीं युवा नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं जिनका कोई जनाधार नहीं है और जो केवल चापलूसी करना जानते हैं।
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गैर-लोकतांत्रिक रवैया: पूर्व सांसद ने राहुल को तानाशाह बताते हुए कहा कि वे वरिष्ठ सहयोगियों की सलाह नहीं सुनते और एक भ्रम में जी रहे हैं कि कांग्रेस कभी दूसरे स्थान से नीचे नहीं गिर सकती।
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अमेठी की हार का जिक्र: अहमद ने ताना मारते हुए कहा कि जो नेता अपने परिवार की पारंपरिक सीट (अमेठी) नहीं बचा सका, वह पार्टी को क्या दिशा देगा।
कांग्रेस से मोहभंग की कहानी
शकील अहमद का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे कांग्रेस के बड़े स्तंभ रहे हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया था।
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वे तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं।
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2000 से 2003 तक बिहार प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को संभाला था।
“वरिष्ठों के सामने असहज होते हैं राहुल”
शकील अहमद ने सीधे शब्दों में कहा, “राहुल गांधी एक कायर और असुरक्षित व्यक्ति हैं। वे किसी भी ऐसे व्यक्ति के सामने खुद को ‘बॉस’ महसूस नहीं कर पाते जिसका बड़ा सार्वजनिक रुतबा हो। यही कारण है कि वे पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं।”
सियासी असर
बिहार की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर शकील अहमद की छवि एक सुलझे हुए नेता की रही है। उनके इस ‘बागी’ तेवर से कांग्रेस के भीतर पुराने बनाम नए नेताओं की जंग एक बार फिर सतह पर आ गई है। विपक्षी दल इस बयान को कांग्रेस की अंदरूनी कलह और नेतृत्व की विफलता के रूप में पेश कर रहे हैं।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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