मातृत्व अवकाश पर SC का बड़ा फैसला
1. मातृत्व संरक्षण मौलिक मानवाधिकार: SC ⚖️
न्यूज़: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मातृत्व संरक्षण को ‘मौलिक मानवाधिकार’ घोषित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मातृत्व के लाभों को इस आधार पर नहीं छीना जा सकता कि बच्चे का जन्म किस तरीके से हुआ है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि माँ और बच्चे के बीच का बंधन जैविक प्रक्रिया से परे होता है और कानून को इसे समान सम्मान देना चाहिए।
2. गोद लिए बच्चे और जैविक बच्चे समान 👶
न्यूज़: सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता की उस विवादास्पद धारा को असंवैधानिक करार दिया है, जो केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही मातृत्व अवकाश की अनुमति देती थी। कोर्ट ने कहा कि परिवार बनाने के लिए ‘गोद लिया हुआ बच्चा’ और ‘जैविक बच्चा’ कानून की नजर में पूरी तरह समान हैं। अब 3 महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली माँ को भी मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकेगा।
3. भेदभावपूर्ण कानूनों पर कोर्ट का प्रहार 🚫
न्यूज़: शीर्ष अदालत ने माना कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य माँ और बच्चे के बीच संबंध को मजबूत करना और महिला के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। 3 महीने की समय सीमा को अतार्किक बताते हुए कोर्ट ने कहा कि यह नियम उन महिलाओं के साथ भेदभाव करता है जो अनाथ या बड़े बच्चों को नया जीवन देने का निर्णय लेती हैं। इस फैसले से उन हजारों कामकाजी महिलाओं को राहत मिलेगी जो गोद लेने की प्रक्रिया से माँ बनती हैं।

