SC : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा (SC/ST) में ‘क्रीमी लेयर’ को आरक्षण से बाहर रखने की याचिकाओं पर

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से उन याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा, जिनमें दाखिले और नौकरियों में आरक्षण के लाभों से अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति की ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर रखने के लिए मानदंड निर्धारित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

समता आंदोलन समिति की याचिका पर सुनवाई

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन वी अंजारी की पीठ ओ पी शुक्ला और समता आंदोलन समिति द्वारा दायर उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें आरक्षण पर एक अगस्त, 2024 के ऐतिहासिक फैसले को लागू करने का आग्रह किया गया है। अदालत ने केंद्र से याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने को कहा। इसने कहा कि इन याचिकाओं पर कुछ समय बाद विचार किया जाएगा।

क्रीमी लेयर सिद्धांत क्या है जिसे लागू करने की मांग हो रही

बता दें कि क्रीमी लेयर सिद्धांत मंडल आयोग के फैसले में प्रतिपादित किया गया था और इस सिद्धांत के तहत, ओबीसी वर्ग के धनी लोगों यानी क्रीमी लेयर को दाखिले और नौकरियों में आरक्षण का लाभ लेने से रोकने की बात कही गई थी। अगस्त 2024 में एक ऐतिहासिक फैसले में, तत्कालीन चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात जजों की संविधान पीठ ने 6:1 के बहुमत से यह माना कि राज्यों को अनुसूचित जातियों (अजा) के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है, जो सामाजिक रूप से एक विषम वर्ग का गठन करते हैं, ताकि उनमें से सामाजिक और शैक्षिक रूप से अधिक पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए आरक्षण प्रदान किया जा सके।

जस्टिस बी आर गवई ने तब क्या कहा था?

जस्टिस बी आर गवई (अब सेवानिवृत्त), जो बहुमत की राय का भी हिस्सा थे, ने कहा था कि ”एम नागराज, जरनैल सिंह और दविंदर सिंह का यह निष्कर्ष कि क्रीमी लेयर सिद्धांत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति पर भी लागू होता है, कानून की सही स्थिति को दर्शाता है”। इस फैसले के मद्देनजर शुक्ला ने केंद्र और राज्यों को सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिए जाने का आग्रह किया।

ब्यूरो रिपोर्ट ऑल राइट्स मैगज़ीन

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