SC: ममता के खिलाफ ED की याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में ED बनाम ममता सरकार: “लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र ले रहा”, ED ने बंगाल की घटना पर दी तीखी दलील; SC ने थमाया नोटिस
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच कानूनी जंग तेज हो गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट में हुई नारेबाजी और आई-पैक (I-PAC) ऑफिस में छापेमारी के मामले में सुनवाई के दौरान ईडी ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
ईडी की दलील: “यह एक चौंकाने वाला पैटर्न है”
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच के सामने बेहद सख्त दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा:
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सुरक्षा बलों का मनोबल: इस तरह की घटनाओं से केंद्रीय बल हतोत्साहित होंगे। अगर राज्य सरकारों को लगेगा कि वे चोरी कर धरने पर बैठ सकते हैं, तो यह गलत मिसाल होगी।
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भीड़तंत्र का खतरा: तुषार मेहता ने कलकत्ता हाई कोर्ट की घटना का जिक्र करते हुए कहा, “जब बड़ी संख्या में लोग कोर्ट में घुस जाते हैं, तो समझ आता है कि लोकतंत्र की जगह अब भीड़तंत्र ले रहा है।”
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सस्पेंशन की मांग: उन्होंने मांग की कि वहां मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए।
ममता सरकार का पलटवार: “आरोप पूरी तरह झूठ है”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने ईडी के दावों को खारिज करते हुए कहा:
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पंचनामा का हवाला: सिब्बल ने दलील दी कि मुख्यमंत्री द्वारा उपकरण ले जाने का आरोप पूरी तरह से गलत है और यह ईडी के अपने पंचनामा से ही साबित होता है।
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पूर्वाग्रह का आरोप: उन्होंने कहा कि ये तमाम आरोप केवल न्यायालय के मन में पूर्वाग्रह पैदा करने के लिए लगाए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “हमें जांच करनी होगी”
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कपिल सिब्बल के दावों पर सवाल उठाए। जस्टिस मिश्रा ने कहा:
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विरोधाभासी दावा: कोर्ट ने कहा कि यदि ईडी का इरादा जबरन जब्ती का होता, तो वे उसे कर लेते, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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नोटिस जारी: कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “हमें इस मामले की गहराई से जांच करनी होगी। आप हमें नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकते।”

