बरेली में बारिश: किसानों की फसलें तबाह

बरेली: दोपहर में छाया अंधेरा, झमाझम बारिश से फसलों पर संकट

बरेली जनपद में बुधवार दोपहर को कुदरत के बदले मिजाज ने हर किसी को हैरान कर दिया। दोपहर करीब 1 बजे अचानक आसमान में काली घटाएं छा गईं और देखते ही देखते दिन में रात जैसा नजारा हो गया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने जहाँ एक ओर तापमान गिराकर लोगों को गर्मी से राहत दी, वहीं दूसरी ओर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।


खेतों में बिछ गई तैयार फसल

यह असमय बारिश और तेज हवाएं इस समय किसानों के लिए किसी आफत से कम नहीं हैं। वर्तमान में खेतों में गेहूं, सरसों और दलहन की फसलें या तो पक चुकी हैं या कटाई के लिए तैयार हैं।

  • फसल गिरना: तेज हवाओं के कारण कई क्षेत्रों में खड़ी फसलें जमीन पर गिर गई हैं (Lodging), जिससे उनके उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका है।

  • क्वालिटी पर असर: विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों में पानी भरने से गेहूं के दाने काले पड़ सकते हैं या उनमें नमी के कारण चमक कम हो सकती है।

किसानों को आर्थिक चोट की चिंता

किसानों के लिए यह नुकसान केवल खेत तक सीमित नहीं है:

  1. उत्पादन में गिरावट: गिरी हुई फसल की कटाई में अधिक मेहनत और लागत लगती है।

  2. मंडी में नुकसान: भीगी हुई या दाने खराब होने वाली फसल को मंडियों में उचित दाम नहीं मिल पाता, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिरने का डर है।

मौसम विशेषज्ञों की राय

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करें और यदि संभव हो तो कटी हुई फसल को ऊंचे स्थानों पर तिरपाल से ढक कर रखें। पहले से ही बढ़ती लागत की मार झेल रहे अन्नदाता के लिए यह ‘बेमौसम’ बरसात एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनकर उभरी है।


(बरेली: ब्यूरो रिपोर्ट) रोहिताश कुमार भास्कर

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)


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