पुत्रदा एकादशी: 31 दिसंबर को शुभ संयोग
पुत्रदा एकादशी 2025: 31 दिसंबर को बन रहा है दुर्लभ ‘चतुर्ग्रही’ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस वर्ष यह पावन तिथि 31 दिसंबर, बुधवार को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत संतान के जीवन के सभी कष्टों को दूर करने और भक्तों के मनोरथ पूर्ण करने वाला माना जाता है.
शुभ मुहूर्त और तिथि का समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, तिथियों का विवरण इस प्रकार है:
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एकादशी तिथि का आरंभ: 30 दिसंबर को सुबह 07:51 बजे से.
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एकादशी तिथि का समापन: 31 दिसंबर को सुबह 05:00 बजे.
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व्रत की तिथि: आचार्य मुकेश मिश्र के अनुसार, एकादशी का व्रत दशमी मिश्रित तिथि में न करके द्वादशी विधि के विधान के अनुसार 31 दिसंबर को ही किया जाएगा.
बन रहे हैं कई दुर्लभ और मंगलकारी योग
इस बार की पुत्रदा एकादशी ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत खास है, क्योंकि इस दिन कई शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं:
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चतुर्ग्रही योग: इस दिन सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र एक साथ धनु राशि में गोचर करेंगे, जिससे शक्तिशाली चतुर्ग्रही योग का निर्माण होगा.
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अन्य शुभ योग: व्रत के दिन सिद्ध, शुभ, रवि और भद्रावास योग जैसे दुर्लभ संयोग भी रहेंगे, जो पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देंगे.
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सकारात्मक ऊर्जा: यह व्रत भाग्य को प्रबल करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.
तुलसी पूजन का है विशेष विधान
पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है:
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दीपदान: शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी या सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ होता है.
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परिक्रमा: तुलसी के पौधे को इस तरह रखें कि उसकी विधिवत परिक्रमा की जा सके.
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तुलसी चालीसा: इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ करना फलदायी माना जाता है.
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शुद्धता: ध्यान रखें कि तुलसी के पौधे के आसपास किसी भी प्रकार की गंदगी न हो
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