प्रयागराज: फर्जी डॉक्टर गैंग का पर्दाफाश
प्रयागराज में फर्जी डॉक्टर फैक्ट्री का भंडाफोड़: एसटीएफ ने मुख्य सरगना मो. तारूक को किया गिरफ्तार
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मेडिकल क्षेत्र में फर्जीवाड़ा करने वाले एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। एसटीएफ ने प्रयागराज के करेली इलाके से मो. तारूक को गिरफ्तार किया है, जो देश के विभिन्न राज्यों के मेडिकल संस्थानों की फर्जी B.A.M.S. डिग्री और मार्कशीट बनाकर लोगों को लाखों रुपये में बेचता था।
6 से 10 लाख रुपये में बिकती थी ‘डॉक्टर’ की डिग्री
गिरफ्तार अभियुक्त मो. तारूक ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह एक डिग्री के बदले 6 से 10 लाख रुपये तक वसूलता था। अभियुक्त ने मिर्जापुर निवासी ब्रह्मानंद नाम के व्यक्ति से बी.ए.एम.एस. की फर्जी डिग्री दिलाने के नाम पर करीब 6 लाख रुपये अपने बैंक खाते में लिए थे।
गिरफ्तारी और बरामदगी का विवरण
एसटीएफ की फील्ड इकाई प्रयागराज ने 09 जनवरी 2026 की रात करीब 11:00 बजे अभियुक्त के कार्यालय ‘सावित्रीबाई फुले मेडिकल रिसर्च सेन्टर’ (करेली) पर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया।
अभियुक्त के पास से बरामद सामान:
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मार्कशीट/सर्टिफिकेट की प्रतियां: 68 अदद
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कम्प्यूटर सीपीयू: 01 अदद
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मोबाइल फोन: 01 अदद
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पेन ड्राइव (32 जीबी): 01 अदद
फर्जी डिग्री से खुद भी बन गया डॉक्टर, मरीजों का कर रहा था इलाज
हैरानी की बात यह है कि आरोपी मो. तारूक ने न केवल दूसरों को फर्जी डिग्रियां बांटीं, बल्कि खुद के और अपनी पत्नी राशिदा परवीन के नाम पर भी ‘उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून’ और अन्य संस्थानों की फर्जी डिग्रियां तैयार की थीं। इन्ही फर्जी कागजातों के सहारे वह क्लिनिक चलाकर गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों का इलाज कर रहा था, जिससे लोगों की जान को भारी खतरा था।
इन विश्वविद्यालयों के नाम पर बांटी फर्जी डिग्रियां
जांच में सामने आया है कि गिरोह ने निम्नलिखित संस्थानों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे:
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर।
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उत्कल यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर, उड़ीसा।
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उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, देहरादून।
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शिवालिक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, आजमगढ़।
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महर्षि चरक आयुर्वेदिक रिसर्च विद्यापीठ व अन्य पैरामेडिकल संस्थान।
विधिक कार्यवाही
एसटीएफ ने अभियुक्त मो. तारूक के खिलाफ थाना करेली (कमिश्नरेट प्रयागराज) में मु0अ0सं0 10/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 338, 336(3), 340 और 66 आईटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया है। आगे की कानूनी कार्यवाही स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है

