उदयपुर में सड़क-शिक्षा पर सियासी घमासान
उदयपुर में बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सियासी घमासान: विपक्ष ने सड़क और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा
उदयपुर/जयपुर – राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र से सामने आई स्कूली बच्चों की एक तस्वीर ने राज्य के ग्रामीण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और शिक्षा सुविधाओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स ने जर्जर सड़कों और जलभराव के बीच जोखिम उठाकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चों की स्थिति पर राजस्थान सरकार के ‘डबल इंजन’ के दावों पर कड़ा हमला बोला है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकारी विज्ञापनों और प्रचार के बावजूद राज्य के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
विपक्ष के मुख्य आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया
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सड़क और कनेक्टिविटी की कमी: मानसून और बारिश के मौसम में कई ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की सड़कों के अभाव में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को कंकड़-पत्थर, कीचड़ और नदी-नालों को पार करके जाना पड़ता है।
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संसाधनों की असमानता: विपक्षी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि जहां एक तरफ नेताओं और रसूखदारों के बच्चे बड़े शहरों व विदेशों के निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम परिवारों के बच्चे बुनियादी रास्ते और सुरक्षित स्कूल भवनों के लिए तरस रहे हैं।
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स्कूल भवनों की स्थिति: हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों से सरकारी स्कूलों की जर्जर छतों और आधारभूत ढांचे की कमी की खबरें सामने आई हैं, जिस पर स्थानीय स्तर पर छात्रों और अभिभावकों द्वारा प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं।
सरकार और प्रशासन का रुख
आरोपों के बीच प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पीडब्ल्यूडी (PWD) और पंचायत समिति स्तर पर नई सड़कों के निर्माण और मरम्मत का काम चरणबद्ध तरीके से जारी है। सरकार का दावा है कि भारी बारिश के कारण जिन इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, वहां त्वरित मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं ताकि स्कूली छात्रों को आवागमन में असुविधा न हो।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

