PNB लोन घोटाला: मनोज परमार पर एक्शन
🚨 ब्रेकिंग: PMEGP/CMYUY लोन फ्रॉड; ED ने मनोज परमार की ₹2.08 करोड़ की संपत्ति कुर्क की
[भोपाल, 28 नवंबर 2025]
प्रवर्तन निदेशालय (ED), भोपाल ज़ोनल ऑफिस ने अवैध ऋण धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई की है। ED ने मनोज परमार और अन्य से संबंधित ₹2.08 करोड़ (लगभग) मूल्य की 12 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Provisionally Attached) कर लिया है।
| विवरण | जानकारी |
| कुर्की की तिथि | 28.11.2025 |
| कुर्क संपत्ति का मूल्य | लगभग ₹2.08 करोड़ |
| संपत्ति का प्रकार | 12 अचल संपत्तियां |
| स्थान | आष्टा, सीहोर (मध्य प्रदेश) |
| मुख्य आरोपी | मनोज परमार और अन्य |
🔍 सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी
ED ने यह जांच सीबीआई, भोपाल द्वारा IPC, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी।
-
मुख्य आरोपी: मनोज परमार, मार्क पायस करारी (तत्कालीन शाखा प्रबंधक, पंजाब नेशनल बैंक, आष्टा, जिला सीहोर), और अन्य।
-
योजनाएं: धोखाधड़ी मुख्य रूप से दो सरकारी योजनाओं के तहत की गई:
-
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
-
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना (CMYUY)
-
-
लोन विवरण: 2016 में, फर्जी आवेदकों, जाली दस्तावेजों और मनगढ़ंत कोटेशनों का उपयोग करके कुल 18 ऋण स्वीकृत किए गए, जिनकी कुल राशि ₹6.20 करोड़ थी, जिसमें से ₹6.01 करोड़ वास्तव में वितरित किए गए।
🏦 बैंक नियमों की अनदेखी और मनी लॉन्ड्रिंग
ED की जांच से पता चला कि बैंक के ऋण स्वीकृति नियमों की घोर अनदेखी की गई:
-
नियमों का उल्लंघन: बैंक के लोन स्वीकृति शर्तों को नज़रअंदाज़ किया गया, दूसरे स्तर की स्वीकृतियाँ (Second-level approvals) बाईपास की गईं, और ऋण शाखा प्रबंधक की वित्तीय शक्तियों से भी परे जाकर स्वीकृत किए गए।
-
योजनाओं का दुरुपयोग: बैंक अधिकारियों द्वारा किए गए फील्ड निरीक्षण में पुष्टि हुई कि कोई भी व्यावसायिक इकाई स्थापित नहीं की गई थी, और कई कथित उधारकर्ताओं ने ऋण के लिए आवेदन करने या प्राप्त करने से इनकार कर दिया।
-
धन का डायवर्जन (Diversion of Funds): धोखाधड़ी से प्राप्त ऋण राशि को मनोज परमार और उनके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित फर्मों के खातों में डायवर्ट किया गया।
-
लेयरिंग और अधिग्रहण: इन खातों से, धन को उनके स्रोत को छिपाने के लिए कई जुड़ी हुई संस्थाओं के बीच घुमाया गया, नकद में निकाला गया, और आंशिक रूप से मनोज परमार और अन्य के नाम पर संपत्तियाँ खरीदने के लिए उपयोग किया गया।
-
अपराध की आय: सरकारी सब्सिडी वाले ऋण निधियों का यह व्यवस्थित रूटिंग, लेयरिंग और नकद निकासी जनता के पैसे के जानबूझकर विचलन को दर्शाता है, जो अपराध की आय (Proceeds of Crime) का निर्माण करता है।
मामले में आगे की जांच जारी है।
