पेट्रोल-डीजल: भारत के पास 25 दिन का तेल

जंग के बीच भारत में तेल का संकट? जानें पेट्रोल-डीजल के दाम और स्टॉक की पूरी सच्चाई

नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है। चूंकि भारत अपनी जरूरतों का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए आम जनता के मन में यह बड़ा सवाल है कि क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छुएंगी?


📌 भारत की स्थिति: 5 बड़ी बातें

  • 25 दिनों का सुरक्षित स्टॉक: सरकारी सूत्रों और न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल 25 दिनों का कच्चा तेल (Crude Oil) और रिफाइंड तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

  • कीमतों पर कोई बदलाव नहीं: राहत की बात यह है कि सरकार की फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने की कोई तत्काल योजना नहीं है

  • नए स्रोतों की तलाश: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में तनाव को देखते हुए भारत ने क्रूड ऑयल, LPG और LNG के लिए वैकल्पिक देशों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

  • रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR): आपात स्थिति के लिए भारत के पास विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पाडुर में भूमिगत स्टोरेज भी हैं, जो संकट के समय काम आएंगे।

  • सीजफायर का असर: अमेरिका-ईरान के बीच हुए हालिया 14 दिवसीय युद्धविराम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है, जिससे भारत पर दबाव कम हुआ है।


तेल का खेल: अब कहां से आएगा कच्चा तेल?

भारत अब केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। तनाव को देखते हुए भारत इन विकल्पों पर तेजी से काम कर रहा है:

  1. रूस (Russia): रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और संकट के समय में भी आपूर्ति जारी है।

  2. अफ्रीकी और अमेरिकी देश: भारत ब्राजील, गुयाना और कुछ अफ्रीकी देशों से तेल आयात बढ़ाने की संभावनाओं को तलाश रहा है।

  3. रूट में बदलाव: होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने पर भारत अन्य समुद्री मार्गों और सुरक्षित बंदरगाहों का उपयोग करने की रणनीति बना रहा है।


आम जनता पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार नहीं जातीं, तब तक भारत में खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम है। वर्तमान में सीजफायर की घोषणा के बाद तेल की कीमतें स्थिर या गिरती हुई नजर आ रही हैं।


गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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