नवरात्रि की पावन संध्या पर दिल्ली के आर.के. पुरम एवं शाहदरा स्थित सीबीडी ग्राउंड में आयोजित भव्य रामलीलाओं का मंचन देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
रामलीला हमारी सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सजीव अभिव्यक्ति है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, धर्म, त्याग, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा के शाश्वत आदर्शों से आलोकित है।
पिता के वचन की मर्यादा रखने के लिए राजसी सुखों का त्याग कर वनवास स्वीकार करना, भ्राता भरत का राजसिंहासन के प्रति अनासक्ति रखते हुए भ्रातृप्रेम और कर्तव्य को सर्वोपरि मानना, माता सीता का अटूट समर्पण, लक्ष्मण जी की भ्रातृनिष्ठा और हनुमान जी की अनन्य भक्ति, रामायण के ये प्रसंग त्याग, प्रेम, सेवा और धर्मपरायणता की अनुपम सीख देते हैं।
प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची महानता पद और सामर्थ्य में नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों के निर्वहन, आदर्शों के पालन और लोककल्याण के प्रति समर्पण में निहित है।
दोनों स्थानों पर कलाकारों ने अपने भावपूर्ण अभिनय और भक्तिमय प्रस्तुतियों से दर्शकों के हृदय को श्रद्धा और भक्ति से अभिभूत कर दिया। रामलीला जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए भावी पीढ़ियों को सनातन जीवन-मूल्यों से जोड़ने और समाज में सदाचार एवं समरसता की भावना को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
जय श्रीराम !
