Mumbai : सुपरटेक: अटके घरों को मिली रफ्तार
सुपरटेक केस: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, घर खरीदारों को मिलेगी राहत 🏠
सुपरटेक: अटके घरों को मिली रफ्तार
हजारों परिवारों के सपनों को मिली नई उड़ान
देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट संकटों में से एक सुपरटेक लिमिटेड मामले में अब एक नई उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद वर्षों से अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की दिशा में ठोस प्रगति का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला उन हजारों होमबायर्स के लिए बड़ी राहत है, जो लंबे समय से अपने आशियाने की बाट जोह रहे थे।
NBCC संभालेगी निर्माण की कमान 🏗️
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब सरकारी कंपनी एनबीसीसी (NBCC) इंडिया लिमिटेड को रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा गया।
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न्यायिक मंजूरी: नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के इस प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है।
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वैधता: अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था पूरी तरह से ‘Insolvency and Bankruptcy Code’ के अनुरूप और उचित है।
पारदर्शिता के लिए ‘एपेक्स कोर्ट कमेटी’ का गठन ⚖️
निर्माण कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है।
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अध्यक्षता: इस समिति का नेतृत्व IRP हितेश गोयल कर रहे हैं।
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प्रमुख सदस्य: समिति में सचिन देव (यूनियन बैंक), प्रवीण निजहावन (एलटी फाइनेंस) और विजय कुमार चौधरी (NBCC) शामिल हैं।
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विशेषज्ञता: जल्द ही एक स्वतंत्र रियल एस्टेट विशेषज्ञ को भी इस टीम का हिस्सा बनाया जा सकता है।
समयबद्ध और पारदर्शी होगा काम ⏳
यह विशेष समिति न केवल प्रोजेक्ट की प्रगति और फंड के उपयोग की निगरानी करेगी, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता पर भी पैनी नजर रखेगी। न्यायिक निगरानी और संस्थागत सहयोग से तैयार यह मॉडल अब उन परिवारों के लिए सुकून भरी खबर है, जो अपने जीवन की जमा-पूंजी इन घरों में लगा चुके हैं।
मुख्य जानकारी:
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एजेंसी: एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड (निर्माण कार्य हेतु)।
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निगरानी: सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एपेक्स कमेटी।
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फोकस: पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्ध पजेशन।
(मुंबई से अनिल बेदाग की रिपोर्ट)
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )
