मुद्रा लोन फर्जीवाड़ा: बैंक मैनेजर गिरफ्तार
दिल्ली: करोड़ों का मुद्रा लोन फर्जीवाड़ा करने वाला यूनियन बैंक मैनेजर गिरफ्तार, STF की बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बैंकिंग सेक्टर में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये का गबन करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है । एसटीएफ ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक नितिन चौधरी को दिल्ली के बसंत विहार इलाके से गिरफ्तार किया है ।
ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल
इस बड़े घोटाले का खुलासा तब हुआ जब लखनऊ निवासी राज बहादुर गुरुंग ने एसटीएफ में शिकायत दर्ज कराई । उन्होंने बताया कि उन्हें व्यापार के लिए लोन की जरूरत थी, जिसके लिए उन्होंने कुछ फॉर्म्स पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन बाद में उन्हें बताया गया कि उनका लोन रिजेक्ट हो गया है । करीब 6 महीने बाद जब उनके पास किश्त (EMI) कटने का मैसेज आया और उन्होंने अपना सिबिल स्कोर चेक किया, तो पता चला कि उनके नाम पर पहले से ही दो लोन स्वीकृत हैं ।
100 से अधिक लोगों के साथ ठगी
एसटीएफ की साइबर टीम द्वारा की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
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संगठित गिरोह: इस गिरोह में बैंक कर्मचारी, फर्जी दस्तावेज बनाने वाले और कूटरचित फर्में संचालित करने वाले सदस्य शामिल हैं ।
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काम करने का तरीका: यह गिरोह असली ग्राहकों के आधार और पैन कार्ड पर लगे फोटो को एडिट कर उनके स्थान पर गिरोह के सदस्यों की फोटो लगा देता था और फर्जी हस्ताक्षर कर मुद्रा लोन पास करा लेता था ।
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करोड़ों का गबन: गिरोह ने अब तक करीब 100 से अधिक लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से मुद्रा लोन निकालकर करोड़ों रुपये हड़प लिए हैं ।
मास्टरमाइंड और गिरफ्तारियां
पूछताछ में पता चला कि इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड आमिर एहसन, नावेद और बैंक मैनेजर नितिन चौधरी व गौरव कुमार थे ।
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नितिन चौधरी: अभियुक्त नितिन चौधरी बीटेक स्नातक है और वर्तमान में दिल्ली की बसंत विहार शाखा में क्रेडिट मैनेजर के पद पर तैनात था । उसने लखनऊ की कल्यानपुर और खुर्रमनगर शाखाओं में प्रबंधक रहते हुए कई फर्जी लोन किए ।
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बरामदगी: गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नकद राशि बरामद हुई है ।
विधिक कार्रवाई
एसटीएफ ने अभियुक्त को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर लखनऊ लाया है । उसे थाना साइबर क्राइम, लखनऊ में दाखिल कर धारा 419, 420, 467, 468, 471 सहित आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं में जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है । फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और फर्जीवाड़े के बैंक खातों की जांच कर रही है ।

