मोदी की पुलिस देश के सांसदों के साथ ऐसा सुलूक कर रही है शर्म आनी चाहिए…
संसद भवन परिसर और सड़कों पर विपक्षी सांसदों तथा पुलिस के बीच हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों और झड़पों को लेकर देश में अलग-अलग राजनीतिक और रणनीतिक राय देखने को मिलती है:
विपक्ष का पक्ष: विपक्षी दलों (INDIA गठबंधन) और उनके नेताओं का आरोप है कि संसद के जनप्रतिनिधियों को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है। उनका तर्क है कि सांसदों के साथ हिरासत और पुलिस बल प्रयोग लोकतंत्र और जनप्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
सरकार और प्रशासन/पुलिस का पक्ष: गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि संसद भवन, निर्वाचन सदन और आसपास के इलाकों में सुरक्षा-व्यवस्था बनाए रखना और धारा 144/निषेधाज्ञा का पालन कराना अति-संवेदनशील ड्यूटी का हिस्सा है। पुलिस के अनुसार, बिना अनुमति के मार्च करने या प्रतिबंधित/सुरक्षित क्षेत्रों में जाने से रोकने के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
