श्रावण पर संदेश: सेवा व जल संरक्षण
पवित्र श्रावण माह पर प्रदेशवासियों को विशेष संदेश: जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सेवा का लें संकल्प; शिव-आराधना से मिलेगा समरसता का मार्ग
विशेष राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक ब्यूरो: लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
पवित्र श्रावण (सावन) माह के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष और प्रेरणादायक संदेश जारी किया गया है। श्रावण माह को केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि लोकमंगल, श्रम के सम्मान, जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का एक बड़ा पर्व बताते हुए सभी से इसे सेवा और सामाजिक सहभागिता का माह बनाने का आह्वान किया गया है।
संदेश में कहा गया है कि सनातन संस्कृति में प्रकृति का नवसृजन और नवोन्मेष देवाधिदेव महादेव की आराधना से जुड़कर मानव जीवन को संयम, सेवा और समरसता का मार्ग दिखाता है।
प्रकृति बोध और सहअस्तित्व के प्रतीक हैं महादेव
सावन के महीने में प्रकृति चारों तरफ नए सृजन का संदेश देती है, जिससे अन्नदाता (किसान) का कठोर परिश्रम धरती पर हरित समृद्धि के रूप में फलीभूत होता है। संदेश में भगवान शिव के स्वरूप को प्रकृति के संतुलन से जोड़ते हुए कहा गया:
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प्रकृति के देवता: भगवान शिव स्वयं प्रकृति बोध के देवता हैं।
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सहअस्तित्व का संदेश: उनकी जटाओं से प्रवाहित माँ गंगा, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, कंठ में विराजे सर्प, नंदी जी और उनके गण—यह सब हमें जीव-जंतुओं और पूरी प्रकृति के साथ शांतिपूर्वक सहअस्तित्व (Co-existence) में रहने की सीख देते हैं।
संकल्प: एक-एक बूंद पानी का सम्मान और वृक्षारोपण
प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि इस श्रावण माह को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखकर इसे सामाजिक चेतना का जरिया बनाएं:
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पर्यावरण संवर्धन व स्वच्छता: इस माह में स्वच्छता बनाए रखने, व्यापक स्तर पर पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लें।
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जल संरक्षण ही वास्तविक संदेश: पानी की प्रत्येक बूंद का सम्मान करना और जल स्रोतों को बचाना ही सावन का वास्तविक और सच्चा संदेश है।
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उत्तर प्रदेश की आधारशिला: पर्यावरण की सुरक्षा, प्रकृति का सम्मान और सामाजिक समरसता ही एक समृद्ध, सुरक्षित और विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला है।
राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक ब्यूरो: लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
ऑल Rights मैगज़ीन (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

