MCD की लापरवाही: दिल्ली में बड़ा गैस घोटाला
🔥 दिल्ली में ‘गैस घोटाला’: धड़ल्ले से हो रहा है घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल, दिल्ली सरकार और MCD की आंखों पर पट्टी!
नई दिल्ली/सोशल मीडिया: राजधानी दिल्ली में एक चौंकाने वाला ‘गैस घोटाला’ सामने आया है, जहां घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों (Domestic LPG Cylinders) का कथित तौर पर खाने-पीने के व्यावसायिक कारोबार (Commercial Use) में धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। एक वायरल वीडियो ने दिल्ली प्रशासन और MCD (Municipal Corporation of Delhi) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनकी उदासीनता से न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लग रहा है, बल्कि आम नागरिकों की जान भी जोखिम में है।
📹 वायरल वीडियो ने खोली पोल: राजेंद्र नगर में बेखौफ उल्लंघन
वायरल हो रहे एक वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि एक खाद्य प्रतिष्ठान (Food Establishment) में सब्सिडी वाले घरेलू LPG सिलेंडर का उपयोग खाना पकाने के लिए किया जा रहा है। यह मामला राजेंद्र नगर में बिजली घर के पास का बताया जा रहा है, जो दिखाता है कि नियमों का उल्लंघन कितनी बेखौफ तरीके से किया जा रहा है।
🚨 क्यों खतरनाक है यह ‘घोटाला’?
घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे सुरक्षा जोखिम कई गुना बढ़ जाता है:
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बढ़ा हुआ सुरक्षा जोखिम: व्यावसायिक रसोई में गैस की खपत और उस पर दबाव अधिक होता है। घरेलू सिलेंडर इस तरह के निरंतर और उच्च दबाव को सहने के लिए डिज़ाइन नहीं किए जाते हैं, जिससे विस्फोट और बड़ी दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है।
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सरकारी राजस्व को नुकसान: ये सिलेंडर आम उपभोक्ताओं को सब्सिडी के तहत दिए जाते हैं। व्यावसायिक उपयोग के लिए कमर्शियल सिलेंडर अनिवार्य होते हैं, जिनकी कीमत अधिक होती है। इस अवैध इस्तेमाल से सरकार को बड़े राजस्व का नुकसान हो रहा है।
❓ दिल्ली सरकार और MCD पर सवाल: किसकी है जिम्मेदारी?
इस गंभीर स्थिति के लिए सीधे तौर पर दिल्ली सरकार और MCD की उदासीनता जिम्मेदार है।
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MCD की लाइसेंसिंग विफलता: किसी भी व्यावसायिक खाद्य कारोबार (होटल, ढाबा, रेहड़ी) को MCD से लाइसेंस लेना होता है, जिसमें सुरक्षा और अग्नि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है। MCD अधिकारी यह सुनिश्चित क्यों नहीं कर रहे हैं कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केवल कमर्शियल सिलेंडर का ही इस्तेमाल हो रहा है?
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दिल्ली सरकार का ढुलमुल रवैया: दिल्ली सरकार के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा और नागरिक आपूर्ति विभाग आते हैं। इन विभागों की शिथिल निगरानी के कारण नियमों का यह व्यापक उल्लंघन हो रहा है। सवाल यह है कि निरीक्षण दल क्या कर रहे हैं और क्या यह सब अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है?
“दिल्ली सरकार और MCD को इस ‘गैस घोटाला’ पर तुरंत एक्शन लेना चाहिए। केवल जुर्माना लगाना काफी नहीं है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जो आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हैं।”
✍️ क्या हैं नियम?
भारत में, घरेलू रसोई गैस सिलेंडर आम उपभोक्ताओं को सब्सिडी के तहत दिए जाते हैं। नियमों के अनुसार, होटल, ढाबा या किसी भी प्रकार के व्यावसायिक खाद्य कारोबार के लिए कमर्शियल सिलेंडर (19 किग्रा या उससे अधिक) का उपयोग करना अनिवार्य और कानूनी रूप से आवश्यक है।
📢 मांग: तत्काल कठोर कार्रवाई की आवश्यकता
यह आवश्यक है कि दिल्ली सरकार और MCD तत्काल इस मामले का संज्ञान लें:
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विशेष अभियान: अवैध रूप से घरेलू सिलेंडर का उपयोग करने वाले सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की जाए।
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लाइसेंस रद्द: नियम तोड़ने वाले प्रतिष्ठानों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं।
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जवाबदेही तय: उन MCD और विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए जिनकी लापरवाही के कारण यह नियम उल्लंघन बड़े पैमाने पर हो रहा है।
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