अवैध ठेलों पर MCD-पुलिस की चुप्पी!

दिल्ली की सड़कों पर ‘मौत’ का जायका? बिना लाइसेंस खुलेआम बिक रहा स्ट्रीट फूड; MCD और पुलिस की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली की गलियों में मिलने वाला स्ट्रीट फूड जितना स्वादिष्ट लगता है, उसके पीछे उतना ही बड़ा खतरा छिपा है। दिल्ली के कोने-कोने में हज़ारों की संख्या में अवैध रूप से चल रहे रेहड़ी-पटरी और ठेलों ने पूरी दिल्ली को एक ‘टिकिंग टाइम बम’ पर खड़ा कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 90% विक्रेताओं के पास न तो फूड लाइसेंस है और न ही सुरक्षा के कोई मानक।

90% ठेलों के पास फूड लाइसेंस नहीं, क्या खा रही है दिल्ली?

नियमों के मुताबिक, किसी भी खाद्य पदार्थ को बेचने के लिए FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) का लाइसेंस अनिवार्य है। लेकिन दिल्ली के चांदनी चौक से लेकर लक्ष्मी नगर और रोहिणी से लेकर साकेत तक, सड़कों पर लगने वाले ठेलों की हकीकत कुछ और ही है।

  • क्या दिल्ली सरकार और MCD ने कभी जांच की कि इन ठेलों पर इस्तेमाल होने वाला तेल, मसाले और पानी सेहत के लिए कितने खतरनाक हैं?

  • बिना हाइजीन ऑडिट के आखिर कैसे राजधानी की सड़कों पर खुलेआम बीमारी परोसी जा रही है?

घरेलू सिलेंडर का अवैध इस्तेमाल: बड़ा हादसा होने का इंतज़ार?

सबसे डरावना मंजर इन ठेलों पर इस्तेमाल होने वाला घरेलू गैस सिलेंडर (Domestic LPG) है। कमर्शियल सिलेंडर की जगह अवैध रूप से घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल हो रहा है, जो कानूनन अपराध है।

  • ये ठेले अक्सर भीड़भाड़ वाले इलाकों और उन सड़कों पर लगते हैं जहां बगल में दर्जनों गाड़ियां पार्क होती हैं।

  • खतरा: अगर किसी एक ठेले पर गैस रिसाव या सिलेंडर ब्लास्ट होता है, तो पास खड़ी गाड़ियां आग की लपटों में घिर जाएंगी, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है।

PHOTO:- लक्ष्मी नगर मेट्रो पिलर नंबर 43 के सामने का दृश्य / घरेलू सिलेंडर का उपयोग करते हुए 

 

MCD और दिल्ली पुलिस की ‘सेलेक्टिव’ कार्रवाई पर सवाल

दिल्ली पुलिस जहाँ एक तरफ मामूली ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर भारी-भरकम चालान काट रही है, वहीं सड़कों पर अवैध रूप से कब्जा जमाए और घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल कर रहे इन ठेलों को ‘नजरअंदाज’ क्यों कर दिया जाता है?

  • MCD की चुप्पी: क्या निगम के अधिकारियों को ये अवैध अतिक्रमण और बिना लाइसेंस के चल रहे ठेले दिखाई नहीं देते?

  • भ्रष्टाचार की बू: स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन ठेलों से होने वाली ‘अवैध वसूली’ के कारण ही पुलिस और MCD आंखें मूंदे बैठी हैं।

PHOTO:- लक्ष्मी नगर मेट्रो पिलर नंबर 43 के सामने का दृश्य / घरेलू सिलेंडर का उपयोग करते हुए !

आम जनता की सुरक्षा दांव पर

सड़क किनारे खड़ी महंगी गाड़ियां और वहां से गुजरते राहगीर हर वक्त एक बड़े खतरे के साये में रहते हैं। पुलिस केवल गाड़ी टो (Tow) करने और पार्किंग का चालान काटने में व्यस्त है, लेकिन सड़क पर खुलेआम जलती ये ‘अवैध भट्ठियां’ प्रशासन की प्राथमिकता में क्यों नहीं हैं?

बड़ा सवाल: क्या दिल्ली प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? कब जागेंगी जांच एजेंसियां और कब होगी इन अवैध फूड स्टॉल्स पर कार्रवाई?


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