वंदे मातरम् पर संसद में महाबहस
📰 संसद में ‘वंदे मातरम्’ पर 10 घंटे की महाबहस: PM मोदी करेंगे लोकसभा में शुरुआत, BJP-कांग्रेस में तीखी नोंक-झोंक की उम्मीद
नई दिल्ली: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में, सरकार ने संसद में इस विषय पर एक लंबी और गहन बहस की शुरुआत की है। लोकसभा में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महत्वपूर्ण चर्चा की शुरुआत करेंगे, जिसके लिए सदन ने कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया है। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं के बीच तीखी बहस होने की उम्मीद है।
लोकसभा में बहस: कौन क्या कहेगा?
यह बहस सरकार के साल भर चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया था और इसे जदुनाथ भट्टाचार्य ने स्वरबद्ध किया था।
| वक्ता का नाम | पार्टी/पद | बहस में भूमिका |
| नरेंद्र मोदी | प्रधानमंत्री, BJP | लोकसभा में बहस की शुरुआत करेंगे। |
| राजनाथ सिंह | रक्षा मंत्री, BJP | बहस में दूसरे प्रमुख वक्ता होंगे। |
| गौरव गोगोई | कांग्रेस | कांग्रेस की ओर से मुख्य वक्ता। |
| प्रियंका गांधी वाड्रा | कांग्रेस | कांग्रेस की ओर से अपनी बात रखेंगी। |
| अन्य कांग्रेसी वक्ता | कांग्रेस | दीपेंद्र हुड्डा, प्रणिती शिंदे, बिमोल अकोइजम आदि। |
पीएम मोदी ने 7 नवंबर को इस वर्षगांठ कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा था कि 1937 में कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को हटाना विभाजन की परिस्थितियों को जन्म देने वाला कदम था।
राज्यसभा में मंगलवार से चर्चा
राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ और चुनाव सुधारों दोनों पर चर्चा मंगलवार से गुरुवार तक चलेगी।
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सत्ता पक्ष: चर्चा की शुरुआत गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। उनके बाद सदन के नेता और स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा अपना पक्ष रखेंगे।
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विपक्ष: विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी बात रखेंगे।
चुनाव सुधारों पर फोकस
‘वंदे मातरम्’ के अलावा, लोकसभा में चुनाव सुधारों पर एक अलग बहस मंगलवार और बुधवार को निर्धारित है। इसमें मतदाता सूची की गहन जांच सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
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कांग्रेस के मुख्य वक्ता: चुनाव सुधारों पर कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी मुख्य वक्ता होंगे।
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अन्य कांग्रेसी वक्ता: के सी वेणुगोपाल, मनीष तिवारी, वर्षा गायकवाड़, उज्ज्वल रमन सिंह, और ज्योति मणि सहित कई अन्य नेता इस बहस में शामिल होंगे।
सत्र की शुरुआत में बाधा
संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर को शुरू हुआ था, लेकिन पहले दो दिन विपक्ष के विरोध के कारण कामकाज बाधित रहा। यह विरोध मानसून सत्र के दौरान हुए विवादों की ही अगली कड़ी है, जिससे संसद की कार्यवाही पर लगातार असर पड़ रहा है। वंदे मातरम् पर होने वाली यह लंबी बहस सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण वैचारिक टकराव का केंद्र बनने की उम्मीद है।
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