लखनऊ | यूपी में SIR के दौरान आपत्तियों पर चुनाव आयोग का बड़ा खुलासा
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान आपत्तियों को लेकर राजनीतिक दलों के दावों पर निर्वाचन आयोग के ताज़ा आंकड़ों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
निर्वाचन आयोग द्वारा 6 जनवरी से 5 फरवरी तक का जो डाटा जारी किया गया है, उसके मुताबिक प्रदेश में गलत तरीके से नाम शामिल होने के आरोपों के बावजूद अधिकांश राजनीतिक दलों की ओर से नाम हटाने के लिए बेहद कम आवेदन किए गए।
आंकड़ों के अनुसार—
कांग्रेस के 96,248 बूथ लेवल एजेंट (BLA) होने के बावजूद एक भी गलत नाम हटाने का फॉर्म जमा नहीं किया गया।
समाजवादी पार्टी के 1,57,257 BLA ने पूरे प्रदेश में केवल 47 फॉर्म ही दिए।
बहुजन समाज पार्टी (BSP) के 1,53,803 BLA द्वारा सिर्फ 6 फॉर्म नाम हटाने के लिए जमा किए गए।
वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 1,61,069 BLA ने प्रदेश भर में 1,566 फॉर्म नाम हटाने के लिए दिए।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची में शामिल पाया जाता है, तो उसके लिए फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
जारी आंकड़ों के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि जब राजनीतिक दल लगातार गलत नाम शामिल होने के आरोप लगा रहे हैं, तो ज़मीनी स्तर पर उनके एजेंटों द्वारा औपचारिक आपत्तियाँ इतनी कम क्यों दर्ज कराई गईं।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )
