जयपुर: 400 करोड़ का भूमि विवाद बहाल

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जयपुर राजपरिवार और JDA के बीच 400 करोड़ का भूमि विवाद फिर शुरू, दीया कुमारी के परिवार को झटका

नई दिल्ली/जयपुर: सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और पूर्व राजपरिवार के बीच चल रहे करोड़ों रुपये के भूमि विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है। कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस पुराने फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें बिना किसी गहन जांच के करीब 400 करोड़ रुपये की बेसकीमती जमीन का मालिकाना हक राजपरिवार के पक्ष में बरकरार रखा गया था।

हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हाईकोर्ट द्वारा जेडीए की अपील को केवल तकनीकी आधार पर खारिज करना अनुचित था।

  • नया निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह जेडीए की पहली अपील पर चार सप्ताह के भीतर मेरिट (योग्यता) के आधार पर निर्णय ले।

  • अनुपालन रिपोर्ट: कोर्ट ने इस मामले में जल्द से जल्द अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा है।

क्या है 400 करोड़ की ‘हथरोई’ जमीन का विवाद?

यह पूरा विवाद जयपुर के मध्य में स्थित हथरोई गांव (अब प्रमुख शहरी विस्तार) की जमीन को लेकर है। इस प्राइम लोकेशन पर स्कूल, अस्पताल और महत्वपूर्ण नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर बने हुए हैं।

  • जेडीए का दावा: राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन ‘सिवाई चक’ यानी बिना खेती वाली सरकारी जमीन है। जेडीए के मुताबिक, 1993 से 1995 के बीच मुआवजे का भुगतान कर इस जमीन का बड़ा हिस्सा कानूनी रूप से अधिग्रहित किया गया था।

  • राजपरिवार का तर्क: उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के परिवार (पूर्व राजपरिवार) का दावा है कि 1949 के विलय समझौते के तहत यह उनकी निजी संपत्ति के रूप में पंजीकृत थी।

कानूनी लड़ाई का घटनाक्रम: कब क्या हुआ?

  1. 2005: राजपरिवार ने मालिकाना हक की घोषणा के लिए मुकदमा दायर किया।

  2. 2011: ट्रायल कोर्ट ने राजपरिवार के पक्ष में फैसला सुनाया और सरकारी राजस्व रिकॉर्ड को खारिज कर दिया।

  3. 2012: जेडीए ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ पहली अपील दायर की।

  4. 2023 (सितंबर): राजस्थान हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर जेडीए की अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

  5. 2025 (दिसंबर): जेडीए ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

जेडीए की दलील: तकनीकी आधार पर नहीं जा सकती सरकारी जमीन

सुप्रीम कोर्ट में जेडीए ने मजबूती से तर्क दिया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने और राजस्व रिकॉर्ड स्पष्ट होने के बावजूद, केवल तकनीकी कारणों से इतनी बड़ी सरकारी जमीन राजपरिवार को नहीं दी जा सकती। जेडीए ने अनुच्छेद 363 के तहत संवैधानिक रोक का भी हवाला दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा रुख के बाद अब राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले की नए सिरे से सुनवाई होगी, जो राज्य सरकार और राजपरिवार दोनों के लिए कानूनी रूप से बेहद अहम साबित होने वाली है।


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