“जय मां स्कन्दमाता: नवरात्र के 5वें दिन मां की कृपा से चमकेगा भाग्य, जानें पूजन का महत्व”
“जय माँ स्कन्दमाता: नवरात्र के पांचवें दिन मां की उपासना से मिलेगी सुख, शांति और समृद्धि”
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्र के पावन पर्व के पांचवें दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कन्दमाता की पूरे विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना की जा रही है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली और परम शांति प्रदान करने वाली मां स्कन्दमाता अपने भक्तों के जीवन में सुख, मंगल, प्रेम और प्रसन्नता का संचार करती हैं।
1. मां स्कन्दमाता का रूप और मंत्र
भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) की माता होने के कारण मां के इस स्वरूप को ‘स्कन्दमाता’ कहा जाता है। मां चार भुजाओं वाली हैं, जो कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं।
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पावन मंत्र:
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।
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पूजा का महत्व: मां की सच्चे मन से पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, उनके संकल्पों को सामर्थ्य मिलता है और जीवन में यश व मंगल की प्राप्ति होती है।
2. मंगल और प्रसन्नता की कामना
मां स्कन्दमाता की असीम कृपा से सभी परिवारों में आपसी प्रेम, सद्भाव और प्रसन्नता का वातावरण बना रहे। मां का आशीर्वाद हर व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति और सफलता प्रदान करता है।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ परिवार की ओर से आप सभी पाठकों को शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन की हार्दिक शुभकामनाएं। जय माँ स्कन्दमाता!
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