IYC की दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका: जंतर-मंतर पर रोक और बैरिकेडिंग को दी चुनौती, जल्द होगी सुनवाई

“IYC की दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति रोकने और बैरिकेडिंग के खिलाफ सुनवाई तय”

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव अब अदालती चौखट तक पहुंच गया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने, बड़े पैमाने पर की गई बैरिकेडिंग और कार्यकर्ताओं के डिटेंशन को लेकर IYC ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के समक्ष याचिका पर शीघ्र सुनवाई (Urgent Listing) की मांग की गई है।

1. याचिका में उठाए गए मुख्य कानूनी बिंदु

IYC कानूनी विभाग द्वारा दायर इस याचिका में दिल्ली पुलिस के फैसलों और गृह मंत्रालय के तहत की गई नाकेबंदी पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं:

  • संवैधानिक अधिकारों का हनन: याचिका में तर्क दिया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 19(1)(b) (शांतिपूर्ण सभा का अधिकार) के तहत विरोध प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार है।

  • अंतिम समय में अनुमति रद्द करना: संगठन का आरोप है कि प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन पहले ही दिया गया था, लेकिन पुलिस ने ऐन वक्त पर (1 अक्टूबर को) लिखित इनकार का आदेश थमाया, जिससे कानूनी विकल्प चुनने का समय न मिले।

  • आम जनता की आवाजाही प्रभावित: याचिका में कहा गया है कि पुलिस ने तय स्थल (जंतर-मंतर) पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने के बजाय पूरी नई दिल्ली क्षेत्र में बैरिकेड्स लगाकर आम जनता की आवाजाही को बाधित किया है।

2. दिल्ली पुलिस का पक्ष और सुरक्षा संबंधी दलीलें

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस और कानून व्यवस्था एजेंसियों का कहना है कि:

  • सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा: लुटियंस दिल्ली और अति-संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था, यातायात प्रवाह और जन-सुरक्षा को बनाए रखने के लिए एहतियाती तौर पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

  • अप्रिय घटना से बचाव: कानून प्रवर्तन एजेंसियों का मानना है कि बिना पूर्व-स्वीकृत सीमा के बड़े जनसैलाब को नियंत्रित करने और किसी भी संभावित टकराव को रोकने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाना प्रशासनिक मजबूरी है।

3. अदालत के रुख पर टिकीं राजनीतिक गलियारों की निगाहें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने याचिका को सूचीबद्ध करते हुए सुनवाई के लिए समय तय किया है। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि जंतर-मंतर जैसे निर्धारित विरोध स्थलों पर प्रदर्शन की इजाजत देने और पुलिस द्वारा लगाई जाने वाली प्रशासनिक पाबंदियों के बीच क्या संतुलन होना चाहिए।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ इस कानूनी लड़ाई, न्यायिक सुनवाई और दिल्ली की कानून-व्यवस्था से जुड़ी हर खबर निष्पक्षता से अपने पाठकों तक पहुंचाती रहेगी।

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