ईरान की दो सेनाएं: आर्टेश बनाम IRGC

ईरान की सबसे घातक ढाल: क्या है IRGC और क्यों है इतनी शक्तिशाली? 🛡️

ईरान की ‘दोहरी’ सेना: आर्टेश बनाम IRGC

मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान की सैन्य संरचना पूरी दुनिया के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। ईरान के पास दो मुख्य सशस्त्र बल हैं, जो अलग-अलग उद्देश्यों के लिए काम करते हैं:

  1. आर्टेश (Artesh): यह ईरान की पारंपरिक नियमित सेना है, जिसका मुख्य कार्य सीमाओं की रक्षा करना है।

  2. IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स): यह केवल एक सेना नहीं, बल्कि ईरान की वैचारिक और राजनीतिक व्यवस्था की रक्षक है। 1979 की क्रांति के बाद गठित यह बल सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है।

इतिहास: भरोसे की कमी से हुआ IRGC का जन्म 📜

1979 में शाह मोहम्मद रजा पहलवी की सत्ता पलटने के बाद, नए क्रांतिकारी नेताओं को पुरानी नियमित सेना (आर्टेश) पर पूरी तरह भरोसा नहीं था, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक राजशाही की सेवा की थी। एक ऐसी सेना की आवश्यकता महसूस की गई जो नई इस्लामिक सरकार के प्रति पूरी तरह वफादार हो। इसी आवश्यकता ने IRGC को जन्म दिया। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध ने इस संगठन को एक छोटे रक्षक बल से बदलकर देश के मुख्य स्तंभ के रूप में स्थापित कर दिया।

IRGC का मिशन और घातक इकाइयां 🚀

IRGC का कार्यक्षेत्र केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं:

  • बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम: ईरान के खतरनाक मिसाइल बेड़े का पूरा नियंत्रण IRGC के पास है, जो दुश्मन के ठिकानों तक मार करने में सक्षम है।

  • कुद्स फोर्स (Quds Force): यह IRGC की सबसे विशिष्ट इकाई है, जो देश की सीमाओं के बाहर खुफिया अभियानों और क्षेत्रीय सहयोगियों (जैसे हिजबुल्लाह और हमास) के साथ समन्वय का प्रबंधन करती है।

  • बसीज (Basij): यह एक विशाल अर्धसैनिक नेटवर्क है, जो आंतरिक सुरक्षा और नागरिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों का उपयोग करता है।

सुप्रीम लीडर की सीधी कमान ⚖️

IRGC की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्वायत्तता है। यह रक्षा मंत्रालय या राष्ट्रपति के बजाय सीधे सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के प्रति जवाबदेह है। यही कारण है कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे मौजूदा 20 दिनों के युद्ध में IRGC ईरान की सबसे मजबूत रणनीतिक ढाल बनकर उभरी है। इनके पास अपनी स्वतंत्र थल सेना, नौसेना और वायु सेना (एयरोस्पेस फोर्स) है, जो इन्हें किसी भी पारंपरिक सेना से कहीं अधिक शक्तिशाली और प्रभावशाली बनाती है।


मुख्य प्रभाव:

  • वैचारिक शक्ति: सरकार और धार्मिक व्यवस्था के प्रति अटूट वफादारी।

  • क्षेत्रीय प्रभाव: कुद्स फोर्स के जरिए पूरे मिडिल ईस्ट में प्रभाव।

  • तकनीकी बढ़त: मिसाइल और ड्रोन तकनीक में विशेषज्ञता।


गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )


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