ईरान-इजरायल युद्ध: गहराया अन्न संकट
ईरान की लंबी जंग की तैयारी: हॉर्मुज पर पहरा और अनाज का बड़ा स्टॉक 🛡️
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त नियंत्रण
28 फरवरी, 2026 को शुरू हुई अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच की जंग अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुँच गई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपनी पहरेदारी सख्त कर दी है। इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में ईंधन संकट गहराने लगा है। तेल के जहाजों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदी लगा दी गई है और अब केवल ईरान की मर्जी से ही चुनिंदा जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता: भुखमरी से बचने की रणनीति 🌾
मरीन ट्रैकिंग डेटा के हालिया आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ईरान एक लंबी लड़ाई के लिए खुद को तैयार कर रहा है। युद्ध के बीच भी ईरान ने उन कार्गो जहाजों को गुजरने का रास्ता दिया है जिनमें खाद्यान्न और कृषि उत्पाद लदे हैं।
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इमाम खुमैनी पोर्ट: 15 और 16 मार्च के बीच कम से कम 6 जहाजों ने ईरान के इस प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र पर माल उतारा है।
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प्रमुख आयात: इन जहाजों के जरिए सोयाबीन और अन्य महत्वपूर्ण अनाज मंगाए जा रहे हैं, ताकि घरेलू खाद्य आपूर्ति में कोई कमी न आए।
अनाज और भंडारण का गणित 📊
ईरान अपनी खाद्य जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है, विशेषकर खाद्य तेल और पशु चारे के लिए:
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मक्का का आयात: ईरान सालाना लगभग 1.5 मिलियन टन मक्के का उत्पादन करता है, जबकि 8 से 10 मिलियन टन मक्का वह ब्राजील से आयात करता है।
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गेहूं का स्टॉक: युद्ध शुरू होने से पहले ही ईरान ने 4 मिलियन टन गेहूं का भंडारण कर लिया था, जो उसकी लगभग 4 महीने की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
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चुनौतियां: ईरान में खेती के लिए पानी की कमी एक बड़ी समस्या है, यही कारण है कि वह बाहरी देशों से बीजों और अनाज के आयात पर जोर दे रहा है।
अमेरिका-इजरायल की बढ़ी चिंता ⚖️
ईरान द्वारा वैकल्पिक शिपिंग लेन का इस्तेमाल और अपनी रसद (Logistics) को मजबूत करना अमेरिका और इजरायल के लिए चिंता का विषय है। ईरान की यह रणनीति दर्शाती है कि वह केवल सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक और घरेलू मोर्चे पर भी किसी भी दबाव को झेलने के लिए तैयार है। यदि हॉर्मुज से तेल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
मुख्य बिंदु:
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रणनीति: हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए दुनिया की ‘एनर्जी सप्लाई’ को रोकना।
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तैयारी: अनाज और खाद्य तेल का बड़े पैमाने पर भंडारण।
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निर्भरता: ब्राजील और कनाडा जैसे देशों से कृषि उत्पादों का आयात।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

