‘मैं अभागा सवर्ण हूं’— UGC कानून पर कुमार विश्वास का फूटा गुस्सा, नेहा सिंह राठौर ने कसा तंज: अब याद आई डेमोक्रेसी?

नई दिल्ली,

केंद्र सरकार के नए UGC कानून को लेकर देश की सियासत और बौद्धिक दुनिया में भूचाल मचा हुआ है। इसी बीच मशहूर कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने इस कानून का खुलकर विरोध करते हुए खुद को “अभागा सवर्ण” बताया, जिससे बहस ने नया मोड़ ले लिया।
एक सार्वजनिक मंच से बोलते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि UGC कानून शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता खत्म करने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विश्वविद्यालयों को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लाकर असहमति और वैचारिक स्वतंत्रता को कुचलना चाहती है।
कुमार विश्वास ने कहा,

“हम जैसे लोग अभागे हैं, जो सवाल भी करें तो हमें ही कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है।”

कुमार विश्वास के इस बयान के बाद लोकगायिका और सामाजिक कार्यकर्ता नेहा सिंह राठौर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए नेहा ने सवालिया अंदाज़ में लिखा—

“तो अब डेमोक्रेसी याद आ रही है? जब छात्र, शिक्षक और आम लोग सड़क पर थे, तब सब खामोश थे।”

नेहा सिंह राठौर ने आगे कहा कि लोकतंत्र की दुहाई अक्सर तब दी जाती है, जब असर किसी खास वर्ग या पहचान तक पहुंचता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि UGC कानून के खिलाफ उठ रही आवाज़ों को जानबूझकर अनसुना किया गया।

गौरतलब है कि UGC कानून को लेकर पहले से ही छात्र संगठनों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और विपक्षी दलों का विरोध जारी है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह राजनीतिक नियंत्रण में ले जाएगा और विश्वविद्यालय केवल आदेश मानने वाली संस्थाएं बनकर रह जाएंगी।

कुमार विश्वास और नेहा सिंह राठौर की इस जुबानी जंग के बाद UGC कानून एक बार फिर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सुर्खियों में है। अब सवाल यही है— क्या सरकार इस विरोध को सुनेगी या असहमति की आवाज़ों को और दबाया जाएगा?

 

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

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