Haryana Assembly: संविधान पखवाड़ा 2026 का आयोजन
“हरियाणा विधानसभा में ‘संविधान पखवाड़ा 2026’ का आयोजन; जनप्रतिनिधि सम्मेलन में लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर मंथन”
विशेष राजनीतिक एवं विधायी रिपोर्ट (ऑल RIGHTs मैगजीन)
चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा में ‘संविधान पखवाड़ा 2026’ के अंतर्गत एक भव्य ‘जनप्रतिनिधि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। श्रीमद्भगवद्गीता की पावन भूमि पर हुए इस सम्मेलन में हरियाणा के वर्तमान और पूर्व विधायकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह आयोजन जनप्रतिनिधियों के बीच अनुभवों और विचारों के आदान-प्रदान के साथ-साथ राज्य और देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को और अधिक सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।
1. संविधान के आदर्श और हरियाणा का योगदान
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संविधान सभा का ऐतिहासिक महत्व: इस अवसर पर वक्ताओं ने रेखांकित किया कि भारत का संविधान हमारे स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों और सामूहिक आकांक्षाओं का जीवंत प्रतिबिंब है। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित संविधान सभा के अन्य सदस्यों के अतुलनीय योगदान से निर्मित यह संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के शाश्वत मूल्यों के जरिए हमारे लोकतंत्र को सही दिशा देता है।
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विकास यात्रा में हरियाणा की भूमिका: हरियाणा ने अपनी विकास यात्रा के दौरान अपने परिश्रम, साहस और समर्पण के बल पर राष्ट्र निर्माण में हमेशा उल्लेखनीय योगदान दिया है।
2. जनप्रतिनिधियों के दायित्व और विधायी परंपराएं
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जनता की अपेक्षाओं को सदन तक पहुँचाना: संसद से लेकर विधानसभाओं और त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं तक, हर एक जनप्रतिनिधि का यह प्राथमिक दायित्व है कि वह आम जनता की अपेक्षाओं को सही मंच पर उठाए, जनहित के विषयों को प्राथमिकता दे और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को हर हाल में बरकरार रखे।
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अनुभव और ऊर्जा का संगम: सम्मेलन में यह बात प्रमुखता से उभरी कि पूर्व विधायकों का अमूल्य अनुभव और वर्तमान जनप्रतिनिधियों की ऊर्जा मिलकर इस उत्तरदायित्व को और अधिक प्रभावी बना सकती है। विचारों में भिन्नता लोकतंत्र का एक स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन आपसी संवाद, सहमति और असहमति का परस्पर सम्मान ही हमें हमारे साझा उद्देश्यों की ओर आगे ले जाता है।
3. ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प
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संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता: संविधान पखवाड़े के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों के प्रति जन-जागरूकता को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना है।
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सशक्त लोकतांत्रिक संस्थाएं: वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के इस साझा मंच ने विधायी परंपराओं को और समृद्ध किया है। संविधान के आदर्शों को अपने आचरण व कार्यशैली में आत्मसात करते हुए देश को वर्ष ‘विकसित भारत 2047’ के महान संकल्प को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ना है।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ का दृष्टिकोण
लोकतंत्र की असली ताकत जनता के अगाध विश्वास और उसकी सक्रिय भागीदारी में निहित है। ऐसे सम्मेलन जनप्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने और विधायी गरिमा को बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होते हैं।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ विधायी गतिविधियों, प्रशासनिक सुधारों और राष्ट्रीय महत्व की हर खबर पर पूरी निष्पक्षता के साथ नजर रखती है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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