गोवा लैंड स्कैम: ED ने ₹1268 Cr जब्त किए

फर्जीवाड़े से गोवा की प्राइम लोकेशन में ज़मीन हड़पने पर ED की बड़ी कार्रवाई

पणजी, गोवा: प्रवर्तन निदेशालय (ED), पणजी आंचलिक कार्यालय ने गोवा में जालसाजी और धन शोधन (Money Laundering) के एक बड़े मामले में ₹1,268.63 करोड़ (लगभग) की अचल संपत्तियाँ (Immovable Properties) अस्थायी रूप से कुर्क की हैं।

27.11.2025 को PMLA, 2002 के तहत की गई इस कार्रवाई में अंजुना, अस्सागाँव (Assagaon), उकासैम (Ucassaim) जैसी गोवा की प्रीमियम लोकेशन्स पर स्थित 5 लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली 19 संपत्तियाँ शामिल हैं।

जालसाजी का तरीका: फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों का खेल

ईडी के अनुसार, शिवशंकर मायकर (Shivshankar Mayekar) के नेतृत्व वाले समूह ने इन संपत्तियों को अवैध रूप से हासिल किया था। इसके लिए उन्होंने फर्जी और जाली भूमि दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया, जिनमें निम्न शामिल थे:

  • फ़र्ज़ी ‘अफ़ोरामैंटो/आवंटन प्रमाण पत्र’ (Aforamento/Allotment Certificates)।

  • ‘अंतिम कब्ज़ा प्रमाण पत्र’ (Certificates of Final Possession)।

  • फर्जी ‘बिक्री विलेख’ (Deeds of Sale) और ‘उपहार विलेख’ (Deeds of Gift)।

यह रैकेट एक संगठित तौर-तरीके से काम कर रहा था। समूह कमज़ोर ज़मीनों की पहचान करता था, फ़र्ज़ी टाइटल दस्तावेज़ बनाता था, और फिर इन जाली दस्तावेज़ों का उपयोग करके संपत्तियों को ‘फ्रंटमैन’ के नाम पर धोखाधड़ी से दर्ज कराता था। बाद में, इन संपत्तियों को बेचकर अपराध की आय (POC) उत्पन्न की जाती थी।

मुख्य आरोपी गिरफ्तार, जांच का दायरा बढ़ा

ईडी ने यह जांच गोवा पुलिस द्वारा यशवंत सावंत और अन्य के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। यह FIR अंजुना के कम्यूनिडेड (Communidade of Anjuna) से जुड़ी ज़मीन की धोखाधड़ी से संबंधित थी। आरोपियों ने फर्जी म्यूटेशन कराकर ज़मीन को अपने नाम कराया और फिर बेच दिया।

ईडी की जांच में शिवशंकर मायकर को मुख्य षड्यंत्रकारी के रूप में पहचाना गया, जिसने दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम पर कई भूखंड अवैध रूप से अधिग्रहित किए।

  • मुख्य आरोपी: शिवशंकर मायकर को ED ने 01.10.2025 को गिरफ्तार किया था और वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है।

  • अन्य मामले: आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ अंजुना और अस्सागाँव क्षेत्रों में अवैध भूमि अधिग्रहण से संबंधित चार अतिरिक्त FIR भी दर्ज हैं।

ईडी ने इस मामले में पहले भी 09.09.2025 और 10.10.2025 को तलाशी अभियान चलाकर ₹12.85 करोड़ के बैंक खाते और अन्य संपत्ति जब्त की थी।

ईडी की जांच जारी है, और इसी तरह के धोखाधड़ी के तरीकों से अधिग्रहित कई अन्य भूखंडों की पहचान की जा रही है।


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