लोकसभा में पास हुआ ‘जी राम जी बिल’

संसद में महासंग्राम: हंगामे और ‘कागज’ फाड़ने के बीच लोकसभा में VB-G-RAM-G बिल पास, मनरेगा का युग समाप्त!

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के इतिहास में बुधवार का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। भारी विरोध, नारेबाजी और सदन के वेल में कागज फाड़कर फेंके जाने के बीच लोकसभा ने ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G-RAM-G बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह कानून अब 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट (मनरेगा) की जगह लेगा।

विपक्ष का उग्र प्रदर्शन: फाड़ी गई बिल की कॉपी

विपक्षी दल इस बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग कर रहे थे। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा के धर्मेंद्र यादव और डीएमके के टीआर बालू समेत कई बड़े नेताओं ने इसे ‘गरीब विरोधी’ करार दिया। सदन के भीतर नजारा तब तनावपूर्ण हो गया जब विपक्षी सदस्यों ने बिल की कॉपियां फाड़ दीं और कागज के हवाई जहाज बनाकर आसन की ओर फेंके। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा, “देश आपको देख रहा है, जनता ने आपको यहाँ कागज फाड़ने के लिए नहीं भेजा है।”

शिवराज सिंह चौहान का तीखा प्रहार: “विपक्ष को है नाम बदलने का शौक”

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिल का पुरजोर समर्थन किया और कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। प्रियंका गांधी के ‘नाम बदलने के शौक’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए चौहान ने कहा:

  • “नाम बदलने का शौक विपक्ष को है, मोदी सरकार सिर्फ काम पर ध्यान दे रही है।”

  • “कांग्रेस ने हमेशा कानूनों का नाम नेहरू परिवार के इर्द-गिर्द रखा।”

  • “मनरेगा भ्रष्टाचार का जरिया बन चुका था, नया कानून इसे जड़ से खत्म करेगा।”

प्रियंका गांधी का पलटवार: “राज्यों पर थोपा जा रहा है बोझ”

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद प्रियंका गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह बिल ग्रामीण रोजगार योजना को खत्म करने की एक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार फंडिंग का पूरा बोझ राज्यों पर डाल रही है, जबकि राज्य सरकारों के पास संसाधन नहीं हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर देश के सबसे गरीब तबके पर प्रहार बताया।

केंद्रीय मंत्रियों ने बताया ‘ऐतिहासिक कदम’

सरकार के मंत्रियों ने विपक्ष के आचरण की कड़ी निंदा की।

  • चिराग पासवान ने कहा, “राम महात्मा गांधी का पसंदीदा नाम था और वे ‘हे राम’ कहते हुए विदा हुए। विपक्ष को इस नाम से आपत्ति क्यों है? उनका बर्ताव दुर्भाग्यपूर्ण है।”

एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि लोकतंत्र में कागज फाड़ने की कोई जगह नहीं है और यह बिल जनता के हित में एक बड़ा सुधार है।

 


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