रवि जैन और प्रकाश जैन पर ED का शिकंजा
जयपुर: ‘माय विक्ट्री क्लब’ के नाम पर करोड़ों की क्रिप्टो ठगी, ED ने मारा छापा; दुबई तक फैले हैं जालसाजी के तार
जयपुर: राजस्थान में निवेश के नाम पर हजारों लोगों को चूना लगाने वाली कंपनी M/s डिजी मुद्रा कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (M/s Digi Mudra Connect Private Limited) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जयपुर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जयपुर और किशनगढ़ (अजमेर) में 7 ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों की ठगी के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।
इस जालसाजी के मुख्य आरोपी रवि जैन और प्रकाश चंद जैन हैं, जिन्होंने ‘क्रिप्टोकरेंसी’ के नाम पर लोगों की मेहनत की कमाई हड़प ली।
‘My Victory Club’ (MVC) ऐप के जरिए बिछाया गया जाल
ED की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपियों ने लोगों को ठगने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया था:
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ऊंचे रिटर्न का लालच: निवेशकों को उनके प्लेटफॉर्म/ऐप ‘माय विक्ट्री क्लब’ (MVC) पर निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया और बहुत अधिक रिटर्न का वादा किया गया।
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फर्जी डिजिटल आंकड़े: निवेशकों के मोबाइल में ऐप इंस्टॉल कर उनकी आईडी बनाई जाती थी, जहां निवेश की गई राशि और ‘डेली प्रॉफिट’ वर्चुअल तौर पर दिखाई देता था।
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विड्रॉल पर रोक: हकीकत में यह केवल डिजिटल आंकड़े थे; किसी भी निवेशक को न तो मूल राशि वापस मिली और न ही कोई लाभ दिया गया।
दुबई में निवेश और संपत्तियों का अंबार
जांच में पता चला है कि निवेशकों का पैसा किसी क्रिप्टोकरेंसी में नहीं, बल्कि प्रमोटरों और उनके रिश्तेदारों के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।
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प्रॉपर्टी का खेल: अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) का इस्तेमाल परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया।
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दुबई कनेक्शन: मुख्य आरोपी रवि जैन फिलहाल दुबई में है। जांच में सामने आया है कि उसने ठगी का पैसा दुबई भेजकर वहां रियल एस्टेट और अन्य व्यवसायों में निवेश किया है।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
31 दिसंबर 2025 को हुई इस कार्रवाई में ED ने भारी मात्रा में सबूत और संपत्ति का पता लगाया है:
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नकदी और बैंक बैलेंस: ठिकानों से ₹11.3 लाख की नकदी जब्त की गई। साथ ही, विभिन्न बैंक खातों में मौजूद लगभग ₹38 लाख फ्रीज किए गए हैं।
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करोड़ों की अचल संपत्ति: छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियों के दस्तावेज और डिजिटल सबूत हाथ लगे हैं।
देशभर में दर्ज हैं मामले
आरोपियों के खिलाफ केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि STF भोपाल (मध्य प्रदेश), हरियाणा, ओडिशा और महाराष्ट्र के विभिन्न थानों में कई FIR दर्ज हैं। हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी का यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर जांच के दायरे में है।
निष्कर्ष: डिजिटल निवेश के इस दौर में ‘क्रिप्टो’ के नाम पर होने वाली ऐसी धोखाधड़ी से सावधान रहने की जरूरत है। ED की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि ठगी का पैसा चाहे देश में हो या विदेश में, कानून के लंबे हाथ वहां तक जरूर पहुंचेंगे।
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