मास्टरमाइंड पिंटू भावसार पर ED का शिकंजा
अहमदाबाद: शेयर बाजार के नाम पर करोड़ों की ठगी, ED ने हिमांशु भावसार के ठिकानों से जब्त किया 4 करोड़ का सोना-चांदी और नकदी
अहमदाबाद: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अहमदाबाद जोनल ऑफिस ने निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले मास्टरमाइंड हिमांशु उर्फ पिंटू भावसार और उसके सहयोगियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई है।
ED की इस रेड में जो बरामदगी हुई है, उसने सभी को हैरान कर दिया है।
बरामदगी का विवरण: खजाना देखकर अधिकारी दंग
ED ने छापेमारी के दौरान ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (अपराध की कमाई) के रूप में भारी मात्रा में कीमती धातुएं और नकदी जब्त की है:
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चांदी: 110 किलोग्राम चांदी की ईंटें (मूल्य ₹2.4 करोड़) और लगभग 39.7 किलोग्राम चांदी के आभूषण।
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सोना: 1.296 किलोग्राम सोने की ईंटें (मूल्य ₹1.7 करोड़)।
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नकदी: ₹38.8 लाख की भारतीय मुद्रा और कम से कम ₹10.6 लाख मूल्य की विदेशी मुद्रा।
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दस्तावेज: विभिन्न संपत्तियों के कागजात भी जब्त किए गए हैं।
कैसे शुरू हुआ ठगी का यह खेल?
ED की यह जांच मेहसाणा जिले के खेरालू पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी।
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लालच और धोखा: आरोपियों ने शिकायतकर्ता को शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया।
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निवेश के बजाय निजी इस्तेमाल: निवेशकों से पैसे तो लिए गए, लेकिन उन्हें किसी भी कंपनी के शेयर में निवेश करने के बजाय आरोपियों ने अपने निजी फायदों के लिए इस्तेमाल किया।
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देशभर में जाल: जांच में पता चला कि भारत के विभिन्न राज्यों में इनके खिलाफ कम से कम 6 और FIR दर्ज हैं, जिनमें कुल धोखाधड़ी की राशि ₹10.87 करोड़ तक पहुंच गई है।
कॉल सेंटर के जरिए बिछाया गया था जाल
मास्टरमाइंड हिमांशु भावसार ने मेहसाणा, विसनगर और वडनगर में कई ऑफिस खोल रखे थे।
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कर्मचारियों की फौज: आरोपियों ने बड़ी संख्या में कर्मचारी रखे थे जो संभावित निवेशकों को फोन करके ऊंचे रिटर्न का लालच देते थे।
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फर्जी एडवायजरी: हिमांशु ने अपने व्यक्तिगत SEBI ‘इन्वेस्टमेंट एडवायजर सर्टिफिकेट’ का गलत इस्तेमाल विश्वास स्टॉक्स रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, दलाल स्टॉक्स एडवायजरी प्राइवेट लिमिटेड और देवकी स्टॉक्स प्राइवेट लिमिटेड के लिए किया।
SEBI का सख्त रुख
SEBI ने अपनी जांच में पाया कि इन तीनों संस्थाओं के पास निवेश सलाहकार के रूप में काम करने का कोई पंजीकरण (Registration) नहीं था। SEBI ने हिमांशु भावसार और अन्य निदेशकों को नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया है।
वर्तमान स्थिति: प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में आगे की जांच कर रहा है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और छिपाई गई संपत्तियों का पता लगाया जा सके।
निष्कर्ष: शेयर बाजार में निवेश के नाम पर होने वाली यह ठगी निवेशकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। हमेशा अधिकृत और सेबी (SEBI) पंजीकृत सलाहकारों के जरिए ही निवेश करें।
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