ED का शिकंजा: 50 करोड़ के घोटाले में CEO अरेस्ट
Mumbai Crime: ‘The Green Billions’ के CEO प्रतीक कनकिया गिरफ्तार, सरकारी कंपनी से ₹50 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मुंबई जोनल यूनिट ने ‘द ग्रीन बिलियंस लिमिटेड’ (TGBL) के सीईओ प्रतीक कनकिया को मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में गिरफ्तार किया है। यह मामला लगभग ₹47.32 करोड़ की हेराफेरी से जुड़ा है। गिरफ्तारी के बाद, आरोपी को मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे 9 जनवरी 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
क्या है पूरा घोटाला?
जांच में सामने आया है कि प्रतीक कनकिया ने एक सरकारी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU), ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) के साथ मिलकर धोखाधड़ी को अंजाम दिया:
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लोन की हेराफेरी: आरोपी ने पुणे नगर निगम (PMC) के एक ‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ (कचरे से बिजली बनाने) प्रोजेक्ट के नाम पर BECIL से ₹50 करोड़ का लोन लिया था।
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फर्जी दस्तावेज: ईडी का आरोप है कि कनकिया ने BECIL के पूर्व कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर जाली और फर्जी दस्तावेजों के जरिए यह क्रेडिट सुविधा हासिल की।
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प्रोजेक्ट का हाल: पुणे नगर निगम के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि प्रोजेक्ट साइट पर कोई काम शुरू ही नहीं हुआ, जबकि लोन की पूरी राशि ले ली गई थी।
अपराध की कमाई से ‘ऐशो-आराम’ की जिंदगी
ईडी की जांच में यह भी उजागर हुआ है कि लोन के रूप में मिली इस बड़ी रकम का इस्तेमाल प्रोजेक्ट के लिए करने के बजाय व्यक्तिगत विलासिता (Lavish Lifestyle) पर किया गया:
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लक्जरी गाड़ियां: आरोपी ने इस पैसे से महंगी गाड़ियां खरीदीं।
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शानदार घर: मुंबई और दिल्ली के प्राइम लोकेशंस पर महंगे रिहायशी मकान किराए पर लिए गए और उनके रिनोवेशन (Renovation) पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
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झूठा प्रभाव: समाज में अपनी आर्थिक समृद्धि का झूठा प्रभाव दिखाने के लिए जनता और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
CBI की जांच से जुड़ी कड़ियां
यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मूल रूप से CBI द्वारा सितंबर 2024 में दर्ज की गई एक एफआईआर से निकला है। इससे पहले, सीबीआई ने BECIL के पूर्व सीएमडी और अन्य शीर्ष अधिकारियों को भी इस घोटाले में उनकी संदिग्ध भूमिका के लिए गिरफ्तार किया था।
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