ED: इंद्रजीत यादव के ठिकानों पर छापा

ED का बड़ा एक्शन: बाहुबली इंद्रजीत सिंह यादव और अपोलो ग्रीन एनर्जी के ठिकानों पर छापेमारी, करोड़ों की उगाही का खुलासा

गुरुग्राम/दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में कुख्यात बाहुबली इंद्रजीत सिंह यादव और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ED ने 26 और 27 दिसंबर 2025 को दिल्ली, गुरुग्राम और रोहतक के 10 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।

UAE से चल रहा था जबरन वसूली का सिंडिकेट

ED की जांच में सामने आया है कि ‘जेम्स ट्यून्स’ (Gem Records Entertainment Pvt. Ltd.) का मालिक इंद्रजीत सिंह यादव हत्या, रंगदारी, धोखाधड़ी और जमीन हड़पने जैसे गंभीर अपराधों में शामिल है। वह वर्तमान में हरियाणा पुलिस से वांछित है और UAE (संयुक्त अरब अमीरात) में छिपकर अपना आपराधिक साम्राज्य चला रहा है।

कैसे होता था ‘करोड़ों का खेल’?

जांच में खुलासा हुआ कि अपोलो ग्रीन एनर्जी लिमिटेड जैसे कॉर्पोरेट घराने झज्जर के दिघल स्थित प्राइवेट फाइनेंसर्स से भारी मात्रा में कैश उधार लेते थे और सिक्योरिटी के तौर पर पोस्ट-डेटेड चेक देते थे।

  • भूमिका: इंद्रजीत सिंह यादव इन लेन-देन में ‘इनफोर्सर’ (Enforcer) की भूमिका निभाता था।

  • तरीका: वह अपने हथियारबंद गिरोहों और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सिंडिकेट का इस्तेमाल कर डरा-धमकाकर सैकड़ों करोड़ के लोन सेटलमेंट कराता था।

  • कमीशन: इन अवैध समझौतों के बदले उसने कॉर्पोरेट घरानों से करोड़ों रुपये कमीशन के रूप में वसूले।

छापेमारी में क्या मिला?

ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में संपत्ति जब्त की है:

  • 05 लग्जरी गाड़ियां और कई बैंक लॉकर।

  • 17 लाख रुपये नगद और आपत्तिजनक दस्तावेज।

  • डिजिटल डिवाइस और डेटा, जिससे करोड़ों के हेरफेर के सबूत मिले हैं।

  • जांच में एक विशेष वेबसाइट/पोर्टल का भी पता चला है, जिसे इंद्रजीत ने कॉर्पोरेट और फाइनेंसर्स के बीच लोन सेटलमेंट के लिए बनाया था।

आय कम, शौक नवाबी

इंद्रजीत सिंह यादव ने अपराध की कमाई से अपने और अपने परिवार के नाम पर कई अचल संपत्तियां और महंगी कारें खरीदीं। एक तरफ वह इनकम टैक्स रिटर्न में अपनी आय बेहद कम दिखाता था, वहीं दूसरी ओर वह अत्यंत विलासितापूर्ण जीवन (Luxurious Life) जी रहा था।

हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज 15 से अधिक एफआईआर (FIR) के आधार पर ED ने इस मामले की जांच शुरू की थी। फिलहाल, ED इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और संपत्तियों की तलाश में जुटी है।


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