ED की पहल: पीड़ितों को मिले 3.50 करोड़
Bank Fraud: ईडी ने कमल कालरा केस में पीड़ितों को लौटाई ₹3.50 करोड़ की संपत्ति, कोटक महिंद्रा बैंक को मिली राहत
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दिल्ली जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के एक बड़े मामले में ‘प्रोसिड्स ऑफ क्राइम’ (POC) यानी अपराध की कमाई को उसके असली हकदारों को लौटाने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की है। जांच एजेंसी ने कमल कालरा मामले से जुड़ी ₹3.50 करोड़ की अचल संपत्ति कोटक महिंद्रा बैंक और अन्य वास्तविक दावेदारों को बहाल (Restituted) कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर से शुरू हुआ था।
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फर्जीवाड़ा: जांच में पाया गया कि 59 चालू खाताधारकों (फर्मों/कंपनियों) ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर हांगकांग और दुबई की विभिन्न कंपनियों को करोड़ों रुपये भेजे थे।
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हवाला कनेक्शन: यह राशि ‘सॉफ्टवेयर आयात’ और ‘अग्रिम आयात प्रेषण’ (Advance Import Remittances) के बहाने भेजी गई थी, जबकि वास्तव में कोई आयात हुआ ही नहीं था। आरोपियों ने बैंक में फर्जी दस्तावेज जमा कर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।
ED की अब तक की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने इस जटिल वित्तीय घोटाले की परतें खोलने के लिए कड़ी मेहनत की है:
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संपत्ति कुर्की: अब तक इस मामले में 7 अस्थायी कुर्की आदेश (PAO) जारी किए गए हैं, जिसके तहत विभिन्न आरोपियों की ₹69 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की गई थीं।
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चार्जशीट: विशेष अदालत (PMLA) के समक्ष अब तक 5 अभियोजन शिकायतें (Prosecution Complaints) दर्ज की जा चुकी हैं।
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Restitution (बहाली): 23 दिसंबर 2025 को ईडी ने अदालत के सामने ‘नो ऑब्जेक्शन’ (अनापत्ति) पेश किया, ताकि कुर्क की गई संपत्ति को उसके असली दावेदारों को लौटाया जा सके।
अदालत का फैसला
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Additional Session Judge) ने ईडी की दलीलों को स्वीकार करते हुए संपत्ति को कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड और इस घोटाले के अन्य पीड़ितों को वापस सौंपने का आदेश दिया।
निष्कर्ष
ईडी का यह कदम दर्शाता है कि एजेंसी न केवल अपराधियों को पकड़ने में जुटी है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि अपराध से प्रभावित बैंकों और लोगों को उनका पैसा वापस मिल सके। यह वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
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