ED का एक्शन: भ्रष्ट अधिकारी की संपत्ति कुर्क

भ्रष्टाचार पर ED का कड़ा प्रहार: विशाखापत्तनम अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी के पूर्व अधिकारी की ₹1.09 करोड़ की संपत्ति कुर्क

विशाखापत्तनम: सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संपत्ति जुटाने वालों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ED के विशाखापत्तनम उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने पशुपति प्रदीप कुमार, जो विशाखापत्तनम शहरी विकास प्राधिकरण (VUDA) के पूर्व अतिरिक्त मुख्य शहरी नियोजक (Additional Chief Urban Planner) रहे हैं, के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी ₹1.09 करोड़ की चल-अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है।

रिश्तेदारों और बेनामियों के नाम पर बनाई थी संपत्ति

ED की जांच के अनुसार, प्रदीप कुमार ने अपनी काली कमाई को छुपाने के लिए उसे अपने परिवार और करीबियों के नाम पर निवेश किया था। कुर्क की गई संपत्तियों में शामिल हैं:

  • आवासीय फ्लैट और प्लॉट: खुद के नाम के अलावा पत्नी और चाचा के नाम पर खरीदे गए।

  • बैंक बैलेंस: अवैध आय को सफेद करने के लिए अलग-अलग बैंक खातों का उपयोग।

  • बेनामी संपत्ति: कोना सिम्हाद्री नाम के व्यक्ति के नाम पर भी संपत्तियां खरीदी गई थीं।

13 साल तक पद का दुरुपयोग कर बनाया ‘अकूत साम्राज्य’

जांच में खुलासा हुआ कि प्रदीप कुमार ने 1984 में सरकारी सेवा शुरू की थी। घोटाले का मुख्य समय जुलाई 2005 से जनवरी 2018 के बीच का है। इस दौरान उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।

ACB की जांच से भी बड़ा निकला घोटाला

दिलचस्प बात यह है कि एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB), विजयवाड़ा ने शुरुआत में इस आय से अधिक संपत्ति (DA) का मामला ₹1.85 करोड़ बताया था। लेकिन जब ED ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत गहराई से जांच की, तो ‘अपराध की कमाई’ (Proceeds of Crime) का कुल आंकड़ा ₹2.94 करोड़ तक जा पहुँचा।

  • ACB का अनुमान: ₹1.85 करोड़

  • ED की जांच में खुलासा: ₹2.94 करोड़

  • ताजा अटैचमेंट: इसी अंतर की भरपाई के लिए ₹1.09 करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति कुर्क की गई है।

कैश जमा कर ऐसे किया गया मनी लॉन्ड्रिंग

ED की जांच में पता चला कि प्रदीप कुमार रिश्वत और अवैध कमीशन से मिले कैश को अपने और परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में जमा करते थे। बाद में इसी पैसे से जमीनें और फ्लैट खरीदे गए ताकि इसे ‘साफ सुथरा’ पैसा दिखाया जा सके।

प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में जांच अभी भी जारी है और कुछ अन्य संपत्तियां भी रडार पर हो सकती हैं।


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